
भोपाल। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में दहेज प्रथा का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां शादी की सभी रस्में पूरी होने के बावजूद दूल्हे पक्ष की लालच ने एक युवती का वैवाहिक जीवन शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया। घटना में आरोप है कि दूल्हे और उसके पिता ने फेरों से ठीक पहले दहेज में 3 लाख रुपये नकद और एक बाइक की मांग रख दी। जब लड़की पक्ष इतनी बड़ी रकम तत्काल देने में असमर्थ रहा तो दूल्हा अपने पिता के साथ बारात लेकर वापस लौट गया। यह घटना न केवल एक परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा पर चोट है, बल्कि समाज में अब भी जड़ें जमाए दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है।
घटना के छह दिन बाद पीड़िता ने साहस जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने दूल्हे मनीष डोडिया उर्फ टिकू और उसके पिता देवनारायण डोडिया के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया। बुधवार को युवती हाथों और पैरों में लगी मेहंदी के साथ थाने पहुंची और एसआई दीपिका लोखंडे के सामने अपना बयान दर्ज कराया। बयान के दौरान वह भावुक हो गई और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के लिए भी यह दृश्य बेहद संवेदनशील और विचलित करने वाला था।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एमए तक शिक्षित है और अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। परिवार ने उसकी शादी को लेकर लंबे समय से तैयारी की थी और पूरी उम्मीद थी कि विवाह के बाद उसकी जिंदगी खुशहाल होगी। उसका रिश्ता भोपाल के गौतम नगर निवासी मनीष डोडिया से तय हुआ था। 30 जनवरी 2026 को विवाह तय होने के बाद दोनों परिवारों में बातचीत होती रही और 2 फरवरी को दूल्हे ने फोन कर तैयारियों की जानकारी भी ली थी। उस समय लड़की पक्ष ने स्पष्ट कहा था कि वे अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही शादी कर पाएंगे।
पीड़िता के अनुसार 6 फरवरी को दूल्हे के पिता देवनारायण डोडिया स्वयं उसके घर पहुंचे और शादी को “धूमधाम से” करने का दबाव बनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि शादी भव्य तरीके से नहीं हुई तो वे रिश्ता तोड़ देंगे। परिवार सामाजिक दबाव और रिश्तेदारों के बीच अपमान के डर से झुक गया और उधार लेकर शादी की तैयारियां पूरी कीं। उन्होंने साहू धर्मशाला बुक की, गृहस्थी का सामान खरीदा, और दूल्हे के लिए सोने की चेन व अंगूठी तक खरीद ली।
12 फरवरी को बारात साहू धर्मशाला पहुंची और सभी रस्में सामान्य तरीके से शुरू हुईं। दोपहर में सगाई हुई, जिसमें दूल्हे को सोने की अंगूठी और 5100 रुपये नकद दिए गए। शाम को बारात के स्वागत के दौरान सोने की चेन भी भेंट की गई। वरमाला की रस्म भी पूरी हो गई थी और माहौल में खुशी का माहौल था। लेकिन इसी बीच अचानक दूल्हे और उसके पिता ने दहेज में 3 लाख रुपये नकद और बाइक की मांग रख दी। इस मांग ने पूरे समारोह का माहौल पलभर में बदल दिया।
लड़की के भाई, मां और रिश्तेदारों ने बार-बार समझाया कि इतनी बड़ी रकम तुरंत देना संभव नहीं है और मेहमानों के सामने ऐसा करना अपमानजनक होगा। लेकिन दूल्हे पक्ष ने कोई नरमी नहीं दिखाई। आरोप है कि उन्होंने पहले दी गई सोने की चेन और अंगूठी वापस की और साफ शब्दों में कहा कि दहेज नहीं मिला तो शादी नहीं होगी। अंततः दूल्हा बिना फेरे लिए बारात लेकर वापस चला गया, जिससे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मामले में एसडीओपी जितेंद्र पाठक ने पुष्टि की कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर दूल्हे और उसके पिता के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
शादी टूटने के बाद युवती गहरे मानसिक तनाव में है। उसने कहा कि दहेज की लालच ने उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना तोड़ दिया। जिस दिन उसे दुल्हन बनकर नई जिंदगी शुरू करनी थी, उसी दिन उसे अपमान और अस्वीकृति का सामना करना पड़ा। अब वह न्याय की उम्मीद में कानून और पुलिस प्रशासन की ओर देख रही है।
समाजशास्त्री डॉ. इम्तियाज खान ने द मूकनायक से बातचीत में कहा, “दहेज प्रथा आज भी हमारे समाज में गहराई से जड़ें जमाए हुए है और यह केवल एक आर्थिक लेन-देन का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता की समस्या है। जब विवाह को लेन-देन बना दिया जाता है तो रिश्ते की पवित्रता खत्म हो जाती है। ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ समाज को भी जागरूक होना होगा, ताकि बेटियों की गरिमा और अधिकार सुरक्षित रह सकें।”
भारत में दहेज प्रथा को रोकने के लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 लागू है, जिसके तहत दहेज लेना, देना या मांगना अपराध माना गया है। इस कानून की धारा 3 के अनुसार दहेज लेने-देने पर कम से कम 5 वर्ष की सजा और न्यूनतम 15 हजार रुपये या दहेज की राशि के बराबर जुर्माना (जो अधिक हो) लगाया जा सकता है, जबकि धारा 4 के तहत दहेज मांगने पर 6 महीने से 2 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (क्रूरता) और 304B (दहेज मृत्यु) जैसी धाराएं भी लागू हो सकती हैं, जिनमें कठोर कारावास का प्रावधान है।
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