
पटना- बिहार की राजधानी पटना में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (डीसीडीआरसी) के अध्यक्ष और एक सदस्य के खिलाफ एक दलित युवक ने पुलिस में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। अनुसूचित जाति से संबंधित शुभम कुमार ने आरोप लगाया है कि आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनिश कुमार ने उनके साथ जातिगत आधार पर अपमानजनक व्यवहार किया, सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज की, मौत की धमकी दी और उनके लंबित उपभोक्ता मामले में न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली। यह शिकायत एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज करने की मांग के साथ पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है।
शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद शुभम कुमार के डीसीडीआरसी पटना में लंबित उपभोक्ता शिकायत मामले (केस नंबर DC/212/CC/539/2024) से जुड़ा है। शुभम ने द मूकनायक को बताया कि जब वे अपने मामले की सुनवाई, आरटीआई प्रक्रिया या शिकायतों के समाधान के लिए आयोग परिसर पहुंचते थे, तो इन दोनों अधिकारियों ने बार-बार उनके साथ भेदभावपूर्ण और धमकी भरा रवैया अपनाया। घटनाक्रम की शुरुआत पिछले साल से हुई, लेकिन 18 फरवरी को हुई घटनाओं ने मामले को चरम पर पहुंचा दिया।
18 फरवरी की सुबह करीब 10:45 बजे शुभम कुमार डीसीडीआरसी परिसर में एनसीडीआरसी की निरीक्षण टीम से मिलने और अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। इसी दौरान सदस्य रजनिश कुमार ने उनसे बाहर ही सामना किया और आक्रामक होकर शारीरिक हमले की धमकी दी। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “तुम नहीं जानते मैं कौन हूं। मेरे पास राजनीतिक समर्थन है। तुम्हें मार दिया जाएगा और कोई बचाने वाला नहीं होगा।” इसके बाद उन्होंने सचिवालय थाने के पुलिसकर्मियों को बुलवाकर शुभम को झूठे आरोप में गिरफ्तार कराने की कोशिश की, जबकि शुभम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे थे। आयोग के गार्ड्स और ड्राइवर ने भी उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोका।
शुभम कुमार ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि इससे पहले कई अवसरों पर दोनों अधिकारियों ने जातिगत आधार पर टिप्पणियां कीं, जैसे “ये एससी लड़का होकर मेरे सिर चढ़ेगा, इसे नाक रगड़वा देंगे, जूते में पर इसका ऑर्डर नहीं पास करेंगे, चाहे जहां जाना है जाए, आरटीआई करता है।”
उसी दिन दोपहर को एक और घटना घटी, जब एक अधिवक्ता ने शुभम से अनुरोध किया कि वे उनकी फोटो प्रेम रंजन मिश्रा और रजनिश कुमार के साथ लें। फोटो खींचते समय अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा ने अचानक गुस्से में आकर शुभम को सार्वजनिक रूप से बुरी-भली गालियां दीं, जैसे “लुच्चा, लफंगा, ह%*मी, फ्रॉड” और उनकी “औकात” पर सवाल उठाया। यह अपमान कई अधिवक्ताओं और मौजूद अन्य लोगों के सामने हुआ।
शुभम कुमार ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि इससे पहले कई अवसरों पर दोनों अधिकारियों ने जातिगत आधार पर टिप्पणियां कीं, जैसे “ये एससी लड़का होकर मेरे सिर चढ़ेगा, इसे नाक रगड़वा देंगे जूते में पर इसका ऑर्डर नहीं पास करेंगे, चाहे जहां जाना है जाए, आरटीआई करता है।” इन बयानों का उद्देश्य उन्हें अपमानित करना और उनके मामले में कोई आदेश पारित न करने की धमकी देना था। इसके अलावा 24 अक्टूबर 2025 और 7 नवंबर 2025 को उनकी आरटीआई अपील में अनावश्यक व्यक्तिगत सुनवाई के नोटिस जारी कर उन्हें परेशान किया गया।
शिकायत में इन घटनाओं को एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 (आपराधिक धमकी), 352 (धमकी का दंड), 126 (अनुचित रोक) और 296 (अश्लील अपशब्द) के तहत अपराध बताया गया है। शुभम ने आरोप लगाया कि इन कार्यों से उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा हुई है और उनकी जान को खतरा है। उन्होंने तत्काल एफआईआर दर्ज करने, जांच कराने, व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करने और सचिवालय थाने के किसी भी दुरुपयोग को रोकने की मांग की है। शिकायत की प्रतियां डीजीपी बिहार, एनसीडीआरसी, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। शुभम कुमार ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने उन्हें व्हिसलब्लोअर के रूप में मान्यता दी है और सुरक्षा के निर्देश दिए हैं।
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