कानून के दुरुपयोग पर पटना हाई कोर्ट सख्त, DM-SP को फटकार लगाते हुए राज्य सरकार पर लगाया 3.9 लाख का जुर्माना

पटना हाई कोर्ट ने अपराध नियंत्रण कानून के मनमाने इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तड़ीपार के तीन आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रभावितों को 3.9 लाख रुपये का मुआवजा देने और यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूलने का सख्त निर्देश दिया है।
Patna High Court
पटना हाई कोर्ट
Published on: 

बिहार: पटना हाई कोर्ट ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना लोगों को 'असामाजिक' घोषित करने की प्रवृत्ति पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को अपराध नियंत्रण कानून के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। इसके साथ ही, अदालत ने तीन अलग-अलग मामलों में तड़ीपार (जिला बदर) के आदेशों को रद्द करते हुए राज्य सरकार पर कुल 3.9 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने आपराधिक रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 11 सितंबर को यह अहम फैसला सुनाया। ये आदेश 12 सितंबर को सार्वजनिक किए गए। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अधिकारी अपनी शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल करके आम नागरिकों को परेशान नहीं कर सकते हैं।

पहला मामला नालंदा जिले के गिरियक ब्लॉक के एक निर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधि चंदन कुमार का है। हाई कोर्ट ने नालंदा के डीएम द्वारा पारित उनके तड़ीपार के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने चंदन कुमार को हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सिलाव पुलिस स्टेशन में अपनी हाजिरी लगाने का निर्देश दिया है। इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को मुआवजे के तौर पर 60,000 रुपये का भुगतान करे।

दूसरा मामला भी नालंदा जिले का ही है, जो कतरीसराय थाना क्षेत्र के निवासी शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह से जुड़ा है। अदालत ने नालंदा डीएम द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश को रद्द कर दिया और इसे बिहार अपराध नियंत्रण कानून के प्रावधानों का खुला दुरुपयोग करार दिया। इस मामले में हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को 1.1-1.1 लाख रुपये (कुल 2.2 लाख रुपये) का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

इसी मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि छोटे-मोटे अपराधों के आरोपियों को असामाजिक घोषित करने के मामले में नालंदा के एसपी एक 'पोस्ट ऑफिस' की तरह और डीएम एक 'कठोर पावर हाउस' के रूप में काम कर रहे थे।

तीसरा मामला बांका जिले के कटोरिया थाना क्षेत्र के रहने वाले गिरधारी यादव का है। बांका के डीएम ने 8 सितंबर 2025 को एक आदेश पारित कर यादव को अपने गांव से 40 किलोमीटर दूर बाराहाट पुलिस स्टेशन में रोजाना हाजिरी लगाने का निर्देश दिया था। अदालत ने इस आदेश को भी अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया और यादव को मुआवजे के रूप में 1.1 लाख रुपये देने का फैसला सुनाया।

अपने अंतिम और सख्त निर्देश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि सभी चारों प्रभावित याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार मुआवजे की इस रकम की वसूली उन जिम्मेदार अधिकारियों से ही करे, जिन्होंने ये गलत और गैरकानूनी आदेश पारित किए थे।

Patna High Court
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: कांगपोकपी के नागा गांव में रातभर फायरिंग, कुकी उग्रवादियों पर हमले का आरोप
Patna High Court
यूपी: बिजली विभाग में दलित इंजीनियरों से भेदभाव का आरोप, SC/ST आयोग ने CM योगी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
Patna High Court
PM मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’: सरकारी तंत्र की भागीदारी पर क्या है विवाद?

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें