लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग (डिस्कॉम) में काम करने वाले दलित इंजीनियरों के साथ कथित तौर पर हो रहे भेदभाव का मामला अब तूल पकड़ रहा है। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
बुधवार को लिखे गए इस पत्र में रावत ने यूपी पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन और अन्य पदाधिकारियों द्वारा सौंपे गए एक ज्ञापन का विशेष रूप से जिक्र किया है। एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में यह आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से दलित इंजीनियरों को लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और कुछ खास मामलों में सेवा नियमों को बेहद चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है।
हालांकि, आयोग के अध्यक्ष का यह पत्र स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। इसके बावजूद, पत्र में मुख्यमंत्री से यह आग्रह किया गया है कि वे एसोसिएशन के ज्ञापन में बताए गए तथ्यों का परीक्षण करवाएं। इसके साथ ही जांच से सामने आए निष्कर्षों के आधार पर उचित और सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की गई है।
इस पूरे विवाद पर यूपी पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर बताया है कि उन्होंने विभिन्न राज्य बिजली कंपनियों में कार्यरत एक दर्जन से अधिक दलित इंजीनियरों का विस्तृत ब्यौरा आयोग को सौंपा है। संगठन का दावा है कि इन अधिकारियों के मामलों में अलग-अलग मापदंड अपनाए गए हैं। अपने इन गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए एसोसिएशन ने आयोग के सामने कई दस्तावेज भी पेश किए हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष पीएम प्रभाकर और पदाधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा तथा मुकेश बाबू ने उम्मीद जताई है कि वास्तविक तथ्य स्थापित करने के लिए जल्द ही जांच शुरू की जाएगी। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य सरकार या विभाग के साथ किसी भी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत अपने इंजीनियरों के अधिकारों की रक्षा करना है।
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