
उत्तर प्रदेश: नोएडा में अप्रैल महीने में हुए मजदूरों के उग्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पत्रकार सत्यम वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने मंगलवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी है। राज्य सरकार ने समानता के आधार पर इस याचिका का विरोध करने के लिए अदालत से समय की मांग की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को की जाएगी। सत्यम वर्मा पर इस प्रदर्शन से जुड़े कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से एक में उन्होंने यह जमानत अर्जी दाखिल की थी।
जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ गौतम बुद्ध नगर के फेज-2 पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत में वर्मा के वकील ने दलील दी कि इसी मामले में एक अन्य सह-आरोपी को 23 जून को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उनके मुवक्किल को भी राहत दी जानी चाहिए। इस पर सरकारी वकील ने आपत्ति जताने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले को आगे के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
हालांकि, कानूनी जानकारों के मुताबिक अगर सत्यम वर्मा को मौजूदा मामले में जमानत मिल भी जाती है, तब भी उनकी जेल से तुरंत रिहाई संभव नहीं है। उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मुकदमे भी लंबित हैं और वे उनमें भी हिरासत में हैं। इसके अलावा, प्रशासन ने उन पर सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी अलग से कार्रवाई की है।
वर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की धारा 7 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बचाव पक्ष ने जिस सह-आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा की जमानत का हवाला दिया था, उसे 23 जून को अदालत से राहत मिली थी। उस फैसले में अदालत ने माना था कि एफआईआर एक भीड़ के खिलाफ दर्ज की गई थी और उसमें शिवा का नाम शामिल नहीं था। शिवा 14 अप्रैल से जेल में बंद था।
'मजदूर बिगुल दस्ता' के संपादक सत्यम वर्मा को 17 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 मई को उन पर और छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर अलग से एनएसए लगा दिया गया था। हालांकि, बीते दो सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में आकृति चौधरी पर लगे एनएसए को रद्द कर दिया था। उस आदेश में अदालत ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम की कड़ी आलोचना की थी और हिरासत आदेश पारित करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि मजदूर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में सत्यम वर्मा की अहम भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक उन्होंने अलग-अलग इलाकों में लोगों को भड़काकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और शांति भंग करने का प्रयास किया था।
यह पूरा बवाल वेतन वृद्धि और काम करने की स्थिति में सुधार की मांग कर रहे मजदूरों के आंदोलन से शुरू हुआ था। बीते 13 अप्रैल को इस प्रदर्शन ने काफी उग्र रूप ले लिया था। उस दिन कई जगहों पर वाहनों में आग लगाने, जबरन घुसपैठ करने और पथराव जैसी हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। हालात को बेकाबू होता देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इस दौरान सैकड़ों मजदूरों और सात कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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