
भोपाल। एमपी में सतना जिले के रामपुर बाघेलान जनपद की ग्राम पंचायत अकौना की एक रोजगार सहायक पर ग्रामीणों ने भारी भ्रष्टाचार, फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल, सरकारी राशि के गबन और मनरेगा योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों की शिकायत पर सरपंच ने जिले के कलेक्टर को एक लिखित शिकायत देकर रोजगार सहायक आरती सिंह के पूरे कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच करवाने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार रोजगार सहायक आरती सिंह पिछले एक वर्ष से पंचायत कार्यालय तक नहीं आई, जिसके कारण सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएँ पूरी तरह ठप हो गईं। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पंचायत में उनके स्थान पर उनके पति, जो नगर निगम सतना में कर्मचारी हैं, दूर बैठे ही काम निपटाते रहे। इससे पंचायत की पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ा है।
फर्जी मस्टररोल और मनरेगा राशि के गबन का आरोप
सबसे गंभीर आरोपों में रोजगार सहायक ने लम्बे समय तक फर्जी मजदूर दिखाकर मस्टररोल भरे, सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर किए और लाखों रुपये की सरकारी राशि अपने परिजनों और परिचितों के खातों में डलवाई।
शिकायत में कहा गया है कि रोजगार सहायक ने अपनी बहन अनामिका सिंह, दूसरी बहन शाधना सिंह, जीजा बीपी सिंह, और उनकी दो बेटियों अनामिका सिंह और जानवी सिंह को मनरेगा मजदूर दिखाकर लाखों की राशि का गबन किया। ग्रामीणों का दावा है कि ये लोग कभी मजदूरी करने पंचायत नहीं आए और ये सभी लोग संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
लैपटॉप योजना की राशि भी फर्जी खाते में डालने का आरोप
आवेदन में लिखा गया है कि वर्ष 2022 में रोजगार सहायक ने अपनी बहन की बेटी अनामिका सिंह के खाते में 62,500 रुपये लैपटॉप योजना के अंतर्गत जारी कर दिए, जबकि लैपटॉप पंचायत में कभी आया ही नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की पुनः जांच की जाए, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला है।
पंचायत कार्यों में बड़े घोटालों का दावा, खेत-तालाब सिर्फ कागजों में बने
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016 से 2023 के बीच जो भी खेत-तालाब बनाए गए, वे ज्यादातर सिर्फ कागजों पर मौजूद हैं। मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत इन कार्यों की राशि रोजगार सहायक ने अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी मजदूर दिखाकर निकाली। ग्रामीणों ने मांग की है कि खेत-तालाब निर्माण से जुड़ी सभी फाइलों, भुगतानों और मजदूरों की सूची की जांच की जाए और गलत भुगतान की रिकवरी की जाए।
चितगढ़ पंचायत में 12 लाख रुपये से अधिक की राशि पति के खाते में डालने का आरोप
शिकायत के अनुसार आरती सिंह पहले चितगढ़ पंचायत में पदस्थ थीं। उस दौरान उन्होंने अपने पति मिलेंद्र सिंह के खाते में करीब 12 लाख रुपये फर्जी तरीके से डलवाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस प्रकार के गंभीर वित्तीय अनियमितताओं पर कड़े प्रकरण दर्ज किए जाएं।
ग्रामसभा में हटाने का प्रस्ताव पारित, फिर भी कार्रवाई नहीं
द मूकनायक से बातचीत में सरपंच श्रद्धा सिंह ने कहा, कि पंचायत की ग्रामसभा में विधिवत प्रस्ताव पारित कर आरती सिंह को पद से हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद आज तक विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद आई जांच टीम ने न तो ग्रामीणों के बयान लिए और न ही सरपंच का पंचनामा, जिससे जांच संदिग्ध लगती है।
पीएम आवास में अपात्र लोगों को लाभ, अधूरे मकानों की राशि निकाली गई
शिकायत के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को आवास स्वीकृत कर दिए गए, जो पात्रता मानकों पर खरे ही नहीं उतरते। कई वास्तविक हितग्राहियों के मकान अधूरे पड़े हैं, फिर भी कागज़ों में उनकी पूरी राशि का भुगतान दिखा दिया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मजदूरों के भुगतान फर्जी तरीके से कराए गए, जिससे मस्टर रोल और वास्तविक कार्य के बीच गंभीर विसंगतियाँ सामने आती हैं। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की दोबारा जांच कराने की मांग की है, ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके और वास्तविक हितग्राहियों को न्याय मिल सके।
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं करता, तो वे पंचायत स्तर पर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
रोजगार सहायक आरती सिंह द्वारा फर्जी दस्तावेज़ों से नौकरी हासिल करने की जांच कर सेवा समाप्ति।
एक वर्ष से पंचायत कार्यालय में अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
फर्जी मस्टररोल, फर्जी मजदूर और फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई राशि की उच्च स्तरीय जांच।
अपने परिजनों के खातों में धनराशि डलवाने पर एफआईआर और रिकवरी।
वर्ष 2016–2023 के सभी मनरेगा कार्यों की आडिट जांच।
पीएम आवास के अपात्र लाभार्थियों पर कार्रवाई और दोबारा सत्यापन।
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