MP: सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला फिर हाई कोर्ट पहुंचा, नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर निर्माण हटाने और जमीन को नगर निगम की घोषित करने पर सवाल; इंदौर हाई कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम और राज्य सरकार से मांगा जवाब
MP: सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला फिर हाई कोर्ट पहुंचा, नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती
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भोपाल। मध्य प्रदेश में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच जमीन अधिग्रहण और सड़क चौड़ीकरण का मामला एक बार फिर न्यायालय पहुंच गया है। इंदौर हाई कोर्ट में दायर याचिका में उज्जैन नगर निगम की उस कार्रवाई को चुनौती दी गई है, जिसके तहत सड़क चौड़ीकरण में बाधक बताए जा रहे निर्माणों को हटाने और संबंधित जमीन पर नगर निगम का आधिपत्य लेने की कार्रवाई की जा रही है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम और राज्य शासन से जवाब मांगा है।

याचिका में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 305 के तहत की जाने वाली कार्रवाई और केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून के बीच टकराव का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा करीब 13 वर्ष पहले लागू किए गए नए भूमि अधिग्रहण कानून के बाद नगर निगम अधिनियम की धारा 305 के तहत जमीन लेने की प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल खड़े होते हैं।

धारा 305 के तहत निर्माण हटाने का अधिकार

याचिका में दावा किया गया है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 305 के तहत निगम को सड़क निर्माण अथवा सड़क चौड़ीकरण में बाधक माने जाने वाले निर्माणों को हटाने की कार्रवाई करने का अधिकार है। इसके साथ ही संबंधित जमीन पर निगम को आधिपत्य भी मिल जाता है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रक्रिया में जमीन के मालिक को उस तरह की मुआवजा प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलता, जैसी केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत निर्धारित की गई है।

भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन अधिग्रहण से पहले संबंधित जमीन मालिकों और प्रभावित लोगों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित करने, उनकी सुनवाई करने और मुआवजा निर्धारित करने जैसी प्रक्रिया का प्रावधान है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 305 में ऐसी विस्तृत प्रक्रिया नहीं है और केवल नोटिस जारी करके कार्रवाई की जा सकती है।

दोनों कानूनों की प्रक्रिया एक-दूसरे के विपरीत

याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में तर्क दिया गया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े केंद्रीय कानून और नगर निगम अधिनियम की धारा 305 की प्रक्रिया में मूलभूत अंतर है।

एक तरफ केंद्रीय कानून प्रभावित जमीन मालिकों को दावे-आपत्ति और मुआवजे की प्रक्रिया उपलब्ध कराता है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम अधिनियम के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण हटाने और जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई अपेक्षाकृत अलग तरीके से की जाती है।

याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर सवाल उठाया है कि केंद्र सरकार का नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद क्या नगर निगम पुराने प्रावधान के आधार पर जमीन का अधिग्रहण या आधिपत्य ले सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी उठा मुद्दा

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का भी उल्लेख हुआ। सुनवाई के दौरान यह सवाल सामने आया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे प्रकरण में इस तरह के विवाद से जुड़े विषय पर फैसला दे चुका है, तो हाई कोर्ट में इस मुद्दे पर दोबारा सुनवाई किस आधार पर की जा सकती है।

इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सुभदा वाघमारे मामले में जब याचिका दायर की गई थी, उस समय केंद्र सरकार का मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून लागू नहीं हुआ था। इसलिए वर्तमान मामले में परिस्थितियां अलग हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि नए केंद्रीय कानून के लागू होने के बाद जमीन अधिग्रहण से जुड़े अधिकारों और प्रक्रियाओं की नए सिरे से कानूनी समीक्षा आवश्यक है।

सिंहस्थ की तैयारियों के बीच बढ़ा जमीन विवाद

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को लेकर सड़क, परिवहन, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों की तैयारियां चल रही हैं। इन परियोजनाओं के लिए सड़क चौड़ीकरण और अन्य निर्माण कार्यों के तहत जमीन की जरूरत भी सामने आ रही है।

ऐसे में जमीन मालिकों और नगर निगम के बीच अधिकार तथा मुआवजे को लेकर विवाद महत्वपूर्ण हो गया है। यदि हाई कोर्ट इस मामले में नगर निगम की कार्रवाई पर कोई महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करता है, तो इसका असर सिंहस्थ से जुड़े सड़क चौड़ीकरण और अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में उज्जैन नगर निगम और राज्य शासन से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में सरकार और नगर निगम की ओर से यह स्पष्ट किया जाएगा कि सिंहस्थ से संबंधित सड़क चौड़ीकरण के लिए धारा 305 के तहत की जा रही कार्रवाई किस कानूनी आधार पर है और केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के साथ इसका क्या संबंध है।

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