
भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में कम बारिश के चलते किसानों के सामने रबी फसल की बोनी और सिंचाई का संकट खड़ा होने का मुद्दा सामने आया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और गंधवानी विधायक उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर धार जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग की है। उन्होंने खरीफ फसल के नुकसान का तत्काल सर्वे कराने, प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने और रबी की सिंचाई के लिए जलाशयों में नर्मदा का पानी पहुंचाने की मांग भी की है।
पिछले साल की तुलना में 42 प्रतिशत कम बारिश का दावा
उमंग सिंघार ने अपने पत्र में कहा है कि इस वर्ष धार जिले में पिछले साल की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है और सिंचाई के पानी की उपलब्धता भी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में रबी फसल की बोनी प्रभावित होने की आशंका है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में बारिश की कमी के आंकड़े अलग-अलग समयावधि के आधार पर अलग दिखाई देते हैं। सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में धार में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की बात कही गई थी, जबकि 6 अक्टूबर की रिपोर्टों में सिंघार के हवाले से पिछले वर्ष की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कमी बताई गई है।
रबी की बोनी पर पड़ सकता है असर
सिंघार का कहना है कि धार आदिवासी बहुल जिला है और यहां बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर है। खरीफ सीजन में कम बारिश का असर पड़ने के बाद अब किसानों के सामने रबी फसल की तैयारी की चुनौती है।
रबी की बोनी के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और सिंचाई की उपलब्धता जरूरी होती है। यदि जलाशयों और अन्य सिंचाई स्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं रहा तो किसानों को बोनी के साथ-साथ फसल को शुरुआती सिंचाई उपलब्ध कराने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
खरीफ फसल का तत्काल सर्वे कराने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से धार जिले में खरीफ फसल का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सर्वे के माध्यम से कम बारिश से हुए फसल नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को राहत उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने सरकार से धार को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने की मांग की है। साथ ही, जिन किसानों को रबी की बोनी के लिए खाद और बीज की आवश्यकता है, उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
जलाशयों में नर्मदा का पानी पहुंचाने की मांग
सिंघार ने रबी की सिंचाई के संकट से निपटने के लिए बाग ब्लॉक में पाइपलाइन के माध्यम से नर्मदा नदी का पानी जलाशयों तक पहुंचाने की मांग की है।
उन्होंने टांडा क्षेत्र, धोकधयड़ी, काकड़खुआ, गुराड़िया, बगोली, इंदिरा गांधी जलाशय, ताराघाटी, धायडी, खनिअंबा, बरेठा, गेटा, बड़कल और चामझर सहित अन्य जलाशयों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जलाशयों में पानी उपलब्ध होने से किसानों को रबी फसल के लिए आवश्यक सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
प्रदेश के अन्य कम बारिश वाले जिलों में भी सर्वे की मांग
उमंग सिंघार ने यह मांग केवल धार जिले तक सीमित नहीं रखी है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश के जिन अन्य जिलों में कम बारिश के कारण किसानों की स्थिति प्रभावित हुई है, वहां भी सरकार को तत्काल फसल सर्वे कराना चाहिए।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक मध्यप्रदेश में बारिश की स्थिति जिलावार काफी अलग रही है। अक्टूबर की शुरुआत में प्रदेश में मानसून की कुल बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बताई गई थी, जबकि पश्चिमी हिस्से के कुछ जिलों में कमी अधिक रही।
सरकार के सामने राहत और सिंचाई दोनों की चुनौती
धार में कम बारिश का मुद्दा अब खरीफ फसल के नुकसान से आगे बढ़कर रबी सीजन की तैयारी से भी जुड़ गया है। एक तरफ किसानों के खरीफ नुकसान का आकलन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर रबी की बोनी के लिए पानी, खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
उमंग सिंघार ने सरकार से मांग की है कि किसानों की स्थिति का जमीनी स्तर पर आकलन कर आवश्यक राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि कम बारिश से प्रभावित किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि राहत और सिंचाई की ठोस व्यवस्था की जरूरत है।
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