
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां मॉब लिंचिंग के एक मामले में सात गो-रक्षकों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली एक जज को धमकियां मिल रही हैं। इस स्थिति को बेहद गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को जज तबस्सुम खान को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मुहैया कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
नर्मदापुरम जिले में अपर सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशंस जज) के पद पर कार्यरत तबस्सुम खान ने हाल ही में 12 जून को एक अहम फैसला सुनाया था। उन्होंने अगस्त 2022 में गो-तस्करी के शक में ट्रक ड्राइवर शेख लाला नजीर अहमद की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में कथित गो-रक्षकों के एक समूह को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही उन्हें लगातार ऑनलाइन दुर्व्यवहार और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया में आई इस खबर पर 1 जुलाई को स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए, जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने इसे एक संगीन मुद्दा करार दिया।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की धमकियां सीधे तौर पर हमारे न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्रता और उनके निडर होकर काम करने की क्षमता में बाधा डालती हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किए हैं।
अदालत ने इन सभी शीर्ष अधिकारियों से इस पूरे प्रकरण पर तीन दिन के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के वकील और मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह बात उनके संज्ञान में आई है कि समाज के कुछ असामाजिक तत्व एक फैसला सुनाने के कारण नर्मदापुरम की न्यायिक अधिकारी को लगातार डरा-धमका रहे हैं।
कोर्ट ने पुलिस और सरकारी महकमे से सीधा सवाल किया है कि नर्मदापुरम की जज के लिए खौफ का माहौल पैदा करने वाले इन उपद्रवियों के खिलाफ अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इस पूरे विवाद और खतरे को देखते हुए नर्मदापुरम पुलिस ने पहले ही मामले में एक एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की जांच की जा रही है।
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