
भोपाल। भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक माह से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहीं 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की रविवार रात मौत हो गई, जिसके साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इस त्रासदी ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। सैकड़ों लोग बीमार पड़े, कई अस्पतालों में इलाज करा चुके हैं और आज भी इलाके के लोग नल का पानी पीने से घबरा रहे हैं। भय, अविश्वास और आक्रोश, तीनों भाव एक साथ भागीरथपुरा की गलियों में महसूस किए जा सकते हैं।
नगर निगम का कहना है कि हालात सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है। इंदौर नगर निगम के अनुसार ड्रेनेज की मेन लाइन का काम पूरा कर लिया गया है और पानी की सप्लाई 30 प्रतिशत क्षेत्र में शुरू कर दी गई है। शेष हिस्सों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। निगम का दावा है कि मेन लाइन का शेष काम आगामी 20 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद पूरे इलाके में नियमित और सुरक्षित जलप्रदाय शुरू होगा। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि लोग अभी भी हर बूंद को लेकर आशंकित हैं।
नगर निगम के प्रयास और जवाबदेही का सवाल
इस पूरे मामले पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि पहले दिन से प्राथमिकता यही रही है कि भागीरथपुरा की स्थिति सामान्य हो। ड्रेनेज की मेन लाइन पूरी हो चुकी है, पानी की सप्लाई का 30 प्रतिशत हिस्सा चालू कर दिया गया है और उसकी निरंतर टेस्टिंग भी की जा रही है। बाकी क्षेत्रों में टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। जवाबदेही के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते अकाउंटेबिलिटी उनकी है और हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में जिम्मेदारियां सामने आएंगी। फिलहाल फोकस केवल एक है, स्थिति को पूरी तरह सामान्य करना।
सोमवार को नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों के साथ भागीरथपुरा का दौरा कर जलप्रदाय लाइनों के कामों का निरीक्षण किया। पानी की टंकी से लेकर तारा मेडिकल और आंगनबाड़ी केंद्र तक चल रहे कार्यों की प्रगति जानी गई। उन्होंने शेष क्षेत्रों में भी तेजी से लाइन डालकर सुचारू और पर्याप्त जलप्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निगम का कहना है कि हर चरण पर सैंपलिंग और क्वालिटी चेक जारी है, ताकि किसी भी तरह का जोखिम दोबारा न हो।
32वीं मौत: इलाज का लंबा संघर्ष और टूटता भरोसा
अनिता कुशवाह के बेटे नीलेश के मुताबिक, उनकी मां को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण उन्हें भाग्यश्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद डिस्चार्ज के कुछ ही घंटों में हालत बिगड़ी, जिसके बाद 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 4 जनवरी को उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया, जहां हालत लगातार गंभीर होती चली गई। किडनी फेल होने पर लगातार हेमोडायलिसिस चला, फिर वेंटिलेटर पर रखा गया। इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट भी आया और आखिरकार रविवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया।
भरोसे की बहाली सबसे बड़ी चुनौती
भागीरथपुरा में तकनीकी काम के साथ-साथ भरोसे की बहाली सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और जिम्मेदार तय नहीं होते, तब तक वे कैसे आश्वस्त हों कि नल का पानी सुरक्षित है। निगम के दावों के बावजूद स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे फिलहाल टैंकर के पानी पर ही निर्भर रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे ने जल-ड्रेनेज नेटवर्क की कमजोरियों को उजागर किया है और स्थायी समाधान के लिए पारदर्शी जांच, सार्वजनिक रिपोर्टिंग और स्वतंत्र जल-गुणवत्ता ऑडिट जरूरी है।
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