MP: शहडोल में CM के काफिले को काले झंडे दिखाने पर नाबालिग को जेल भेजा, बोर्ड परीक्षा छूटी! कौन जिम्मेदार?

किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को वयस्क जेल में नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें बाल देखभाल गृह या निरीक्षण गृह में रखा जाना चाहिए। वकील के अनुसार दस्तावेजों के बावजूद प्रशासन ने रिहाई में देरी की और औपचारिकताएं पूरी होने में समय लग गया।
सत्यम को परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे जेल से रिहा किया गया,  वो परीक्षा केंद्र पर पहुंच भी नहीं पाया।
सत्यम को परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे जेल से रिहा किया गया, वो परीक्षा केंद्र पर पहुंच भी नहीं पाया।
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शहडोल- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक 17 वर्षीय छात्र सत्यम प्रजापति अपनी कक्षा 12वीं की अंग्रेजी बोर्ड परीक्षा देने से चूक गया, क्योंकि उसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन के आरोप में जेल भेज दिया गया था।

घटना 8 फरवरी को हुई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहडोल पहुंचे। उनके काफिले के गुजरते समय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार स्थिति कुछ देर के लिए उत्तेजक हो गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की गई। शाम को करीब 40 कांग्रेसियों को निवारक गिरफ्तारी के तहत हिरासत में लिया गया। इन्हें बुढ़ार तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया, जहां अधिकांश को जमानत मिल गई, लेकिन सत्यम समेत तीन युवकों को जमानत से वंचित रखते हुए रात 10 बजे जेल भेज दिया गया।

सत्यम के वकील का दावा है कि सत्यम की उम्र 17 वर्ष 8 महीने है। उनका जन्म 22 मई 2008 को हुआ था, जिसके प्रमाण के रूप में आधार कार्ड और मार्कशीट पेश की गई थी। किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को वयस्क जेल में नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें बाल देखभाल गृह या निरीक्षण गृह में रखा जाना चाहिए। वकील के अनुसार, दस्तावेजों के बावजूद प्रशासन ने रिहाई में देरी की और औपचारिकताएं पूरी होने में समय लग गया।

सत्यम ने बताया कि उसे परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे जेल से रिहा किया गया। एक पुलिसकर्मी ने 50 रुपये दिए और परीक्षा देने के लिए कहा, लेकिन समय निकल चुका था और वो परीक्षा केंद्र पर पहुंच भी नहीं पाया। उसने कहा कि वरिष्ठ नेता भी पहचानने से इनकार कर रहे थे।

दूसरी ओर, शहडोल जिला प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि सत्यम या उनके पक्ष से उम्र के प्रमाण पुलिस या तहसीलदार को कभी नहीं दिए गए। प्रशासन का कहना है कि सत्यम को सुबह 6 बजे रिहा कर दिया गया था, जो परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले था। उसे पुलिस एस्कॉर्ट भी दिया गया ताकि वे समय पर परीक्षा दे सकें। प्रशासन ने दावा किया कि छात्र ने जानबूझकर परीक्षा देने से परहेज किया और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।

पुलिस का पक्ष है कि गिरफ्तारी के समय सत्यम ने जो उम्र बताई, उसी आधार पर कार्रवाई की गई। वहीं छात्र पक्ष का आरोप है कि दस्तावेज पहले से उपलब्ध थे, लेकिन रिहाई में जानबूझकर विलंब किया गया।

सत्यम को परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे जेल से रिहा किया गया,  वो परीक्षा केंद्र पर पहुंच भी नहीं पाया।
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सत्यम को परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे जेल से रिहा किया गया,  वो परीक्षा केंद्र पर पहुंच भी नहीं पाया।
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