केंद्रीय विश्वविद्यालयों में SC/ST/OBC शिक्षकों के 4000+ पद खाली! समावेशी उच्च शिक्षा का सपना कब पूरा होगा?

अजाक ने UGC से विशेष भर्ती ड्राइव की मांग, सामाजिक न्याय पर सवाल
उच्च शिक्षा
उच्च शिक्षाग्राफिक- द मूकनायक
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जयपुर- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए असक्रिय संगठन डॉ. अम्बेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी-कर्मचारी एसोसिएशन (AJAK) राजस्थान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है।

पत्र में अजाक के अध्यक्ष श्रीराम चोरड़िया ने UGC के अधीन देश के 56 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के स्तर पर SC/ST/OBC वर्गों के लगभग 4000 बैकलॉग पदों को तत्काल भरने की मांग की है। ये पद वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं, जिससे उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है।

पत्र में दी गई प्रमुख आंकड़ों की जानकारी (30 जून 2025 की स्थिति के अनुसार, लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब से)

कुल स्वीकृत पद: प्रोफेसर - 2537, एसोसिएट प्रोफेसर - 5105 , असिस्टेंट प्रोफेसर - 11309 कुल मिलकर 18951 पद। जनरल वर्ग के लिए तीनों ही श्रेणियों में कुल पद 10, 836 हैं जिनमे 9254 पद भरे हुए हैं लेकिन आरक्षित वर्गों में भर्तियों की स्थिति खराब है।

भरे हुए पदों में आरक्षित वर्गों की स्थिति बेहद खराब:

1. प्रोफेसर स्तर पर SC वर्ग के 66% और ST वर्ग के 84% पद रिक्त।

2. एसोसिएट प्रोफेसर में भी SC/ST/OBC के बड़े प्रतिशत पद खाली।

3. कुल मिलाकर SC/ST/OBC के लगभग 4000 पद बैकलॉग में हैं।

पत्र में कहा गया है कि कई विश्वविद्यालयों में वर्षों से इन बैकलॉग पदों पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया और न ही विशेष भर्ती अभियान चलाए गए, जबकि योग्य अभ्यर्थियों की पर्याप्त उपलब्धता है। यह स्थिति न केवल संविधान के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य और शैक्षणिक वातावरण को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।

अजाक की प्रमुख मांगें:

UGC द्वारा सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विशेष भर्ती अभियान (Special Recruitment Drive) चलाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।

भर्ती प्रक्रिया के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की जाए और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। UGC विनियमों एवं भारत सरकार की आरक्षण नीति का कड़ाई से अनुपालन कराया जाए।

बैकलॉग पदों की भर्ती में देरी करने वाले विश्वविद्यालयों के खिलाफ उत्तरदायित्व तय किया जाए।

श्रीराम चोरड़िया ने पत्र में विश्वास जताया कि UGC इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक और प्रभावी निर्णय लेकर उच्च शिक्षा में समावेशन, समानता एवं सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि विशेष भर्ती अभियान चलाकर इन बैकलॉग पदों को भरना समय की मांग है।

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब हाल के महीनों में UGC के 2026 इक्विटी रेगुलेशंस और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर बहस जारी है, साथ ही विभिन्न विश्वविद्यालयों में बैकलॉग पदों की भर्ती के लिए विशेष ड्राइव चलाए जा रहे हैं। अजाक की यह पहल SC/ST/OBC समुदायों में व्यापक चर्चा का विषय बन गई है।

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