नई दिल्ली: पांच साल पुराने लखीमपुर खीरी मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर प्रदर्शन कर रहे चार किसानों को अपनी गाड़ी से कुचलने का गंभीर आरोप है।
मंगलवार को वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ट्रायल जज पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जज गवाहों को डराने और पूरे मुकदमे को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने एक अहम जानकारी रखी। उन्होंने बताया कि जब एक मुख्य गवाह ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अपनी गवाही टालने की गुहार लगाई, तो ट्रायल जज ने उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
अदालत में अपनी बात रखते हुए प्रशांत भूषण ने साफ शब्दों में कहा कि इस न्यायिक अधिकारी को तुरंत बदला जाना चाहिए। उन्होंने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो इस मामले में न्याय की पूरी तरह से हत्या हो जाएगी।
भूषण ने जज पर जिले में व्यवस्था बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, यह ट्रायल जज एनडीपीएस और एससी/एसटी एक्ट से जुड़े गंभीर मामलों को खुद सुनते हैं और ज्यादातर मामलों में आरोपियों को बरी कर देते हैं।
इन दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि यह बात सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है कि सरकारी वकील ही इस मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही से पीछे हट रहे हैं।
कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल प्रभाव से वर्तमान सरकारी वकील को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिले के किसी सबसे वरिष्ठ या बेहद अनुभवी वकील को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि नया सरकारी वकील उन सभी गवाहों को वापस बुलाए, जिन्हें पिछले अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट में गवाही देने से छोड़ दिया था।
गंभीर मामलों में ट्रायल जज द्वारा बड़ी संख्या में आरोपियों को बरी किए जाने के आरोपों को भी बेंच ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से कहा है कि वह प्रशांत भूषण की इस शिकायत को इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भेजे, ताकि इस पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से इस पूरे मामले में उठाए गए कदमों पर एक 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' भी दाखिल करने को कहा है।
गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में भी कोर्ट ने यूपी पुलिस को आशीष मिश्रा द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिशों से जुड़े आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। फिलहाल मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा जमानत पर बाहर है, लेकिन अदालत ने उसे अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी में रहने पर रोक लगा रखी है।
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