
बेंगलुरु- कर्नाटक सरकार ने एक बड़े विवाद के बीच राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और सिविल राइट्स एन्फोर्समेंट निदेशालय के महानिदेशक (DGP) डॉ. के. रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके कार्यालय में महिला के साथ कथित अश्लील व्यवहार को दर्शाने वाले वायरल वीडियो के बाद की गई है, जो सरकारी सेवक के आचरण के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संज्ञान में आए इस मामले ने पुलिस विभाग में अनुशासन और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी आदेश संख्या डीपीएआर/26/एसपीएस/2026, दिनांक 19 जनवरी के अनुसार, डॉ. रामचंद्र राव को ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 की धारा 3(1)(a) के तहत निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि वीडियो और समाचार रिपोर्टों से स्पष्ट है कि अधिकारी का व्यवहार अश्लील था, जो सरकार को शर्मिंदा करने वाला और नियम 3 ऑफ ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 का उल्लंघन है।
सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर वायरल हुए इस वीडियो में कथित तौर पर डॉ. राव को अपने आधिकारिक कार्यालय में महिला के साथ घनिष्ठता दिखाते हुए देखा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया था और इसमें अधिकारी पुलिस वर्दी में महिला को गले लगाते और चूमते नजर आ रहे हैं। महिला अलग-अलग अवसरों पर कार्यालय पहुंची थी और विभिन्न परिधानों में थी। हालांकि, कोई जबरदस्ती का आरोप नहीं है, लेकिन यह घटना कार्यालय के समय सरकारी गरिमा और पुलिस की नैतिक छवि को ठेस पहुंचाने वाली बताई जा रही है।
यह वीडियो सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर #KarnatakaDGPScandal और #DGPRamachandraRao जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर हो गए हैं, जबकि आम जनता पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है।
निलंबन अवधि के दौरान डॉ. राव को ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 की धारा 4 के अनुसार सब्सिस्टेंस भत्ता मिलेगा। साथ ही, उन्हें राज्य सरकार की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की मनाही है। जांच पूरी होने तक यह निलंबन प्रभावी रहेगा।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस वीडियो से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह मामला और गहरा सकता है, खासकर जब पुलिस विभाग की विश्वसनीयता पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीडियो की प्रामाणिकता साबित हो गई, तो यह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण बनेगा।
कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को राज्यपाल के नाम पर जारी किया है, जिस पर डीपीएआर (सर्विसेज-4) के अंडर सेक्रेटरी के.वी. अशोका ने हस्ताक्षर किए हैं। फिलहाल, वीडियो की जांच और आगे की अनुशासनिक कार्रवाई पर नजरें टिकी हुई हैं।
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