दावोस में बड़ा समझौता: झारखंड में 11,100 करोड़ का निवेश करेगी टाटा स्टील, 'ग्रीन स्टील' तकनीक से बदलेगी औद्योगिक तस्वीर

दावोस में सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में समझौता; HISARNA और EASyMelt तकनीक से कम होगा कार्बन उत्सर्जन, मिलेंगे हजारों नए रोजगार
Jharkhand Tata Steel Investment
झारखंड के लिए दावोस से बड़ी खबर! टाटा स्टील करेगी ₹11,100 करोड़ का निवेश। ग्रीन स्टील तकनीक और नए रोजगारों का रास्ता साफ।
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दावोस/रांची: वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में झारखंड ने एक बड़ी छलांग लगाई है। स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इस 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LoI) के तहत टाटा स्टील राज्य में न्यू एज ग्रीन स्टील (New Age Green Steel) प्रौद्योगिकियों और अन्य विस्तार परियोजनाओं में 11,100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी।

इस निवेश का उद्देश्य झारखंड में औद्योगिक ढांचे को मजबूत करना, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

7,000 करोड़ का निवेश सिर्फ नई तकनीक पर

इस समझौते के तहत सबसे बड़ा हिस्सा, यानी 7,000 करोड़ रुपये, आयरनमेकिंग की क्रांतिकारी तकनीकों—HISARNA और EASyMelt—पर निवेश किया जाएगा।

HISARNA प्रोजेक्ट

यह एक गेम-चेंजर तकनीक है जो कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक की कमी ला सकती है। नीदरलैंड में इसके सफल पायलट परीक्षण के बाद, टाटा स्टील 2030 तक जमशेदपुर में लगभग 1 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला कमर्शियल प्लांट लगाने की योजना बना रही है। इसमें स्वदेशी कोयले और निम्न-श्रेणी के अयस्क का उपयोग होगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।

EASyMelt तकनीक

यह दुनिया का अपनी तरह का पहला समाधान है, जो 'इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर' का उपयोग करता है। इससे कोक की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी।

कॉम्बी मिल और टिनप्लेट विस्तार भी शामिल

ग्रीन तकनीक के अलावा, इस निवेश पैकेज में एक अत्याधुनिक कॉम्बी मिल के लिए 1,500 करोड़ रुपये और टिनप्लेट विस्तार के लिए 2,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि यह निवेश झारखंड को हरित आयरनमेकिंग तकनीक में 'फर्स्ट मूवर' (First Mover) के रूप में स्थापित करेगा।

औद्योगिक पर्यटन और आईटीआई (ITI) को लेकर भी सहमति

बैठक के दौरान सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई:

  1. औद्योगिक पर्यटन: राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एक अलग एमओयू (MoU) पर सहमति बनी है, जिसके तहत झारखंड में टाटा समूह के खनन और विनिर्माण स्थलों पर 'औद्योगिक पर्यटन' को बढ़ावा दिया जाएगा।

  2. आईटीआई को गोद लेना: मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव रखा कि राज्य की आईटीआई (ITI) संस्थाओं को रोजगार और बाज़ार उन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील उन्हें गोद ले, जिस पर कंपनी ने अपनी सहमति जता दी है।

टाटा स्टील सीईओ ने की सीएम की सराहना

टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन ने दावोस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य को ऐसे वैश्विक मंचों पर नियमित रूप से भाग लेना चाहिए।

बैठक के अंत में टाटा समूह द्वारा मुख्यमंत्री को दावोस स्थित 'टाटा डोम' में रात्रिभोज का आमंत्रण दिया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया। राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुए इस समझौते को झारखंड के औद्योगिक सफर में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

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