
महाराष्ट्र: नासिक जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में एक बार फिर किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के बैनर तले हजारों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इन किसानों ने नासिक से गुजरात जाने वाले प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।
हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और दोनों तरफ के यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वाहनों को वैकल्पिक मार्गों (alternate routes) से डायवर्ट किया है।
आंदोलनकारी किसान मुख्य रूप से वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत जमीन पर अपने अधिकार और सिंचाई सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
AIKS के पदाधिकारी इरफान शेख ने इस मुद्दे पर स्पष्टता से बात रखते हुए कहा, "किसानों की बुनियादी मांग यह है कि उन्हें वन अधिकार कानून (FRA) के तहत आवंटित जमीन के पार्सल मिलने चाहिए। जिन लाभार्थियों को जमीन मिल चुकी है, उन्हें 'शेतकरी सम्मान योजना' जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाना चाहिए। साथ ही, इन जमीन मालिकों के नाम सरकारी भूमि रिकॉर्ड (सात-बारा) में भी दर्ज होने चाहिए।"
आंदोलन में शामिल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के जिला सचिव इंद्रजीत गावित ने क्षेत्र में जल संकट और अन्याय की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "नासिक जिले से कई नदी-जोड़ो (river-linking) और जल-परिवर्तन की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन विडंबना यह है कि यहां के स्थानीय किसानों को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।"
किसान केवल एक जगह नहीं, बल्कि जिले के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर धरने पर बैठे हैं। वे तालुका मुख्यालयों और प्रमुख बाजारों में जमा हैं। इनमें वणी-सापुतारा रोड पर स्थित बोरगड, नासिक-धर्मपुर रोड पर स्थित बर्हे, पेठ, हरसुल, त्र्यंबकेश्वर, डिंडोरी और सुरगाणा जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं।
सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अपर जिलाधिकारी हेमांगी पाटिल और देवदत्त केकान ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल की मांगों को सुना। किसानों का नेतृत्व पूर्व विधायक जेपी गावित, इरफान शेख और अन्य नेताओं ने किया।
प्रशासन के साथ बातचीत के दौरान पूर्व विधायक जेपी गावित ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "हमने अधिकारियों को किसानों की समस्याओं से अवगत कराया है और उनका ध्यान इस तथ्य की ओर खींचा है कि नासिक से मुंबई तक निकाले गए पिछले दो 'लॉन्ग मार्च' के दौरान किए गए वादों और आश्वासनों पर अब तक कोई ठोस विकास नहीं हुआ है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो हम फिर से मुंबई तक लॉन्ग मार्च निकालेंगे।"
जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना है। कलेक्टर ने कहा, "इनमें से अधिकांश मुद्दे नीतिगत (policy matters) हैं। हम इन्हें राज्य और केंद्र सरकार के पास भेजेंगे। साथ ही, हमने आंदोलनकारियों से अनुरोध किया है कि वे सड़कों को ब्लॉक न करें और यातायात में आम लोगों को असुविधा न पहुंचाएं। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि वे ऐसा नहीं करेंगे।"
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