झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट | अस्पताल में भी नहीं टूटा हौसला; भूख हड़ताल के 10वें दिन देवेंद्र नाथ महतो ने पुलिस लाठीचार्ज पर मांगा जवाब

इंसाफ की मांग करते हुए लिखा खुला पत्र
पत्र में महतो ने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो।
पत्र में महतो ने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो। x @DevendraNathMa9
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रांची- झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है। आंदोलन के प्रमुख चेहरे देवेंद्र नाथ महतो ने सदर अस्पताल से एक भावुक खुला पत्र जारी करते हुए बताया कि उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद अपने दसवें दिन में जारी है और आगे भी बिना रुके चलती रहेगी।

पत्र में महतो ने लिखा कि उनका शरीर भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन न्याय की मांग और संघर्ष का हौसला कतई कमजोर नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि "जेपीएससी-जेएससी भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड अभियान" 5 जुलाई से लगातार चल रहा है, जिसके तहत छात्रों और युवाओं का यह संघर्ष कई सप्ताह से जारी है।

महतो ने अपने पत्र में 10 अगस्त को आयोजित "झारखंड विधानसभा घेराव कार्यक्रम" को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए इसमें शामिल हुए सभी छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, मीडियाकर्मियों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया।

पत्र में महतो ने लिखा कि उनका शरीर भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन न्याय की मांग और संघर्ष का हौसला कतई कमजोर नहीं पड़ा है।
पत्र में महतो ने लिखा कि उनका शरीर भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन न्याय की मांग और संघर्ष का हौसला कतई कमजोर नहीं पड़ा है।

हालांकि पत्र का सबसे गंभीर हिस्सा पुलिस कार्रवाई को लेकर है। महतो के अनुसार, विधानसभा घेराव कार्यक्रम के दौरान देर शाम पुलिस उन्हें और उनके साथ मौजूद करीब 100 छात्रों को खुद एस्कॉर्ट करके एक स्थान तक ले गई थी। वहां वे शांतिपूर्ण ढंग से बैठे हुए थे, तभी बिना किसी पूर्व चेतावनी के पुलिस ने अचानक धक्का-मुक्की करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से सदर अस्पताल रांची लाकर भर्ती कराया गया। महतो ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को लाठीचार्ज ही करना था, तो उन्हें उस स्थान तक ले जाया ही क्यों गया, और इस सवाल का जवाब मांगा।

उन्होंने इस पूरी घटना को "बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्रवाई" करार देते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। महतो ने झारखंड सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि लाठीचार्ज और बल प्रयोग से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, और उनका आंदोलन हिंसा नहीं बल्कि संविधान व लोकतंत्र के रास्ते पर चलते हुए अधिकारों की लड़ाई है।

पत्र में उन्होंने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो। पत्र के अंत में उन्होंने राज्य भर के छात्रों और युवा साथियों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से इस "न्याय की लड़ाई" को मजबूती से जारी रखें।

गौरतलब है कि जेपीएससी-जेएससी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर झारखंड में छात्र संगठन लंबे समय से मुखर रहे हैं, और यह ताजा घटनाक्रम आंदोलन को और तेज कर सकता है।

कौन हैं महतो जिन्हें साथी कहते हैं 'झारखण्ड के वांगचुक' ?

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं और उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा बुंडू में हुई। उन्होंने साल 2006 में दसवीं और 2008 में इंटर की पढ़ाई पूरी की, इसके बाद रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से 2017 में संस्कृत विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की, फिर कुरमाली भाषा में प्रथम श्रेणी से स्नातकोत्तर (पीजी) किया और हजारीबाग से बी.एड की डिग्री भी प्राप्त की।

वह 2015 से ही छात्रवृत्ति, पेपर लीक, आरक्षण नीतियों व परीक्षा गड़बड़ियों जैसे मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। छात्र नेता महतो ने 2024 के लोकसभा चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के बैनर तले रांची सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी। इस चुनाव में उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए 1,32,647 वोट हासिल किए। जानकारी के मुताबिक छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों में सक्रियता के कारण उन पर 11 मामले भी दर्ज हैं। इसके बाद उन्होंने 2024 का विधानसभा चुनाव सिल्ली सीट से लड़ा था।

वर्तमान में वे JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं, और जब तक दोनों एजेंसियों में पूरी सफाई नहीं होगी, तब तक भूख हड़ताल जारी रखने की कसम खा चुके हैं, जिस वजह से समर्थक उन्हें "झारखंड का सोनम वांगचुक" भी कहने लगे हैं।

पत्र में महतो ने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो।
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पत्र में महतो ने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो।
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पत्र में महतो ने मांग की कि उनके और उनके साथी छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो।
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