
नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बढ़ते आंदोलन के बीच मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है और उन्हें हर हाल में न्याय मिलेगा।
मुख्यमंत्री रामगढ़ में अपने पिता शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यहीं पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट किया। सोरेन ने कहा कि संविधान और कानून के दायरे में युवाओं के लिए जो भी जरूरी होगा, सरकार वह सब करेगी और छात्रों के साथ न्याय किया जाएगा।
इस मुद्दे पर सरकार की गंभीरता को दर्शाते हुए सीएम ने एक बेहद भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को लेकर बेहद संवेदनशील है और इसे पूरी गंभीरता से देख रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वह सचमुच अपना सीना चीर कर तो नहीं दिखा सकते, लेकिन यही वास्तविकता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी सरकार किसी मुद्दे को अपने हाथ में लेती है, तो उसका उद्देश्य मामले को उचित तरीके से सुलझाकर ही खत्म करना होता है।
जांच की प्रगति के बारे में बताते हुए सोरेन ने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले में दिन-रात काम कर रही हैं। फिलहाल सरकार को जांच रिपोर्ट, इसके निष्कर्षों और अंतिम नतीजों का इंतजार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द इस घटनाक्रम से जुड़ी सारी विस्तृत जानकारी छात्रों और राज्य की जनता के सामने रखी जाएगी।
इस बीच, रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार 11वें दिन भी छात्रों का धरना पूरे जोश के साथ जारी रहा। राज्य के विभिन्न जिलों से और भी छात्र व अभ्यर्थी इस आंदोलन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र महतो ने भी छात्रों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। इस मुद्दे को लेकर वे पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
यह पूरा विवाद 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक परिणामों की घोषणा के बाद शुरू हुआ था। अभ्यर्थियों ने कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इनमें श्रेणी-वार कट-ऑफ मार्क्स जारी न करना और जेपीएससी के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना ही मेरिट लिस्ट का प्रकाशन जैसे मुद्दे शामिल हैं। सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार की कथित ओएमआर शीट वायरल होने के बाद यह मामला और भी गरमा गया। छात्रों का दावा है कि उस उम्मीदवार को अनुमानित कट-ऑफ से कम अंक मिलने के बावजूद उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।
इन गंभीर आरोपों को देखते हुए झारखंड सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी थी। इसके बाद से ही जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीआईडी ने मामले की तह तक जाने के लिए रांची, पलामू और हजारीबाग में ताबड़तोड़ छापेमारी की है और कई गिरफ्तारियां भी की हैं।
अब इस छात्र आंदोलन को चारों तरफ से भारी समर्थन मिलने लगा है। राज्य की राजधानी में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों की मुख्य मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जांच का जिम्मा केंद्रीय एजेंसी (सीबीआई) को सौंपा जाए। साथ ही वे इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
विभिन्न राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भी इस विरोध प्रदर्शन के सुर में सुर मिलाया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वीडियो कॉल के जरिए प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित किया और उन्हें अपने पूरे समर्थन का भरोसा दिया। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की नेता नेहा बोरा भी 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक निकाले जाने वाले छात्रों के मार्च में शामिल होने के लिए रांची पहुंचने वाली हैं।
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