
नई दिल्ली- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने आए अपने नेताओं, स्वयंसेवकों और नागरिकों की कथित अवैध हिरासत की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने शारीरिक बल, धमकियों और मनमाने प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर लोगों को विरोध का संवैधानिक अधिकार इस्तेमाल करने से रोका।
दिल्ली में रविवार दोपहर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CJP के नेताओं ने पिछले 72 घंटों को आपातकाल जैसी स्थिति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पार्टी प्रतिनिधियों को बिना लिखित आधार बताए हिरासत में लिया, कानूनी सलाहकार से मिलने नहीं दिया, बिना जब्ती मेमो के उनके फोन जब्त कर लिए और प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक हमला व धमकी दी।
पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने गृहनगर लौटने से पहले बयान जारी कर कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका तथा लीगल लीड रत्ना सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग करने से पार्टी को नहीं रोक पाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐशे घोष और AISF के विराज देवांग भी मौजूद रहे।
CJP के अनुसार सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका तथा संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरते ही जबरन रोककर अलग-अलग अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया। उन्हें हिरासत का लिखित आधार नहीं दिखाया गया, कानूनी सलाहकार से नहीं मिलने दिया गया और बिना जरूरी दस्तावेजों के उनके फोन जब्त कर लिए गए।
लीगल लीड रत्ना सिंह को भी पुलिस ने अलग से हिरासत में लिया और कथित तौर पर कठोर व्यवहार किया। पार्टी ने हिरासत में जब्त किए गए निजी उपकरणों की सुरक्षा और हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार पर जवाबदेही की मांग की।
आशुतोष रांका ने कहा, “लड़ाई चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इसे खुद के खिलाफ लड़ाई बना लिया।”
सौरव दास ने कहा, “लोग दिल्ली इसलिए आ रहे हैं क्योंकि वे निर्धारित विरोध स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं। सरकार को पुलिस कार्रवाई के बजाय प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए बुलावा भेजना चाहिए था।”
पार्टी ने यूट्यूबर ध्रुव राठी की कथित हिरासत का भी जिक्र किया। राठी ने अपनी वापसी के बाद जारी वीडियो में कहा कि उन्हें उनके निवास से बिना कानूनी वारंट के सादे कपड़ों में आए कर्मियों ने उठा लिया। उन्होंने कहा, “मुझे गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया, मुझे अपहृत किया गया।” CJP ने इसे सत्ता पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ जबरदस्ती के इस्तेमाल का उदाहरण बताया।
पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक हिंसा हुई, जिसमें मुंबई के एक CJP कोऑर्डिनेटर के साथ हिरासत में दुर्व्यवहार शामिल है। उसने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया और आरोपों की जांच की मांग की। स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को धमकियां, यात्रा पर प्रतिबंध और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच में बाधा डालने के आरोप भी लगाए गए।
रत्ना सिंह ने कहा, “यह सरकार डरी हुई है। यह अपने नागरिकों को एकजुट होने और विरोध करने से रोक रही है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं और युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित उत्पीड़न और हिंसा के आरोप भी लगाए गए। पार्टी ने एक वीडियो का हवाला दिया जिसमें एक युवती और अन्य प्रदर्शनकारियों पर कुछ लोगों द्वारा हमला किया जा रहा है, जबकि पुलिसकर्मी चुपचाप खड़े रहे। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी के सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं द्वारा हमलों की बात कही थी। पार्टी ने महिलाओं के उत्पीड़न के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
CJP ने गुरद्वारा बंगला साहिब में पुलिस के प्रवेश की भी निंदा की। पार्टी के अनुसार दंगा नियंत्रण गियर और हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों ने जूते पहने हुए परिसर में प्रवेश किया, शरण ले रहे लोगों को जबरन निकाला, अवैध हिरासत की और प्रबंधन समिति पर दबाव डाला कि वे भोजन या आश्रय न दें।
पार्टी ने प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न और बाधा डालने के आरोपों की भी निंदा की तथा प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की। अभिजीत दिपके की दादी के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए पार्टी ने हिरासत में रहते हुए परिवार से संपर्क पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की।
CJP ने दोहराया कि प्रदर्शनकारी दिल्ली अपने संवैधानिक अधिकारों का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने आए थे। पार्टी ने किसी भी अवैध रूप से हिरासत में रखे गए व्यक्ति की रिहाई, पुलिस की कथित ज्यादतियों की जवाबदेही, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा शांतिपूर्ण सभा पर प्रतिबंध हटाने की मांग की। उसने कहा कि चुनाव आयोग से जवाबदेही और लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए उसका अभियान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें