
नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए दिल्ली में 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश पारित किए। जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों की सभा पर, जहां निषेधात्मक आदेश लागू नहीं हैं, किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा हिरासत में नहीं लिया जाए।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू करने संबंधी बोर्ड हटा दिया जाए (यदि पहले नहीं हटाया गया हो), ताकि न्याय तक पहुंच को लेकर कोई आशंका न रहे।
पीठ ने आगे निर्देश दिए कि मेट्रो और रेल सुविधाएं सामान्य रूप से चलेंगी, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी को ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत प्रतिबंध लगाने की जरूरत न हो। शहर में लोगों की मुक्त आवाजाही की अनुमति दी जाए, बशर्ते ट्रैफिक नियम लागू रहें। बैरिकेड लगाने के आदेशों की तुरंत समीक्षा की जाए, जिसमें कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति का ध्यान रखा जाए। इंटरनेट सुविधाएं अबाधित रहेंगी। सभी निर्देश कानून-व्यवस्था की स्थिति के अधीन हैं।
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के आश्वासन को नोट किया कि मेट्रो रेलवे पूरी तरह से काम कर रही है, कल रात 10 बजे से सभी स्टेशन खुले हैं, ट्रेनें सामान्य रूप से चल रही हैं और इंटरनेट कनेक्शन बहाल कर दिया गया है।
पीठ ने शुक्रवार के उस आदेश का भी जिक्र किया जिसमें अधिकारियों को दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने की अधिसूचना पर दोबारा विचार करने को कहा गया था। उसमें कहा गया था कि मेट्रो और रेल सेवाओं का संचालन विनियमित किया जा सकता है, लेकिन उपयुक्त मामलों में भी पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया और कथित अवमाननाकर्ताओं को जवाब में शपथपत्र दाखिल करने तथा पूर्व आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने को कहा। आज उल्लेख की गई अन्य अनलिस्टेड याचिकाओं को अवमानना कार्यवाही के साथ टैग कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पुलिस द्वारा ट्रेनों से लोगों को उठाने, जंतर मंतर के 4 किलोमीटर दायरे से बाहर हिरासत, इंटरनेट निलंबन और मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने जैसे मुद्दे उठाए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाओं में कोई कटौती नहीं हुई और कुल संचालन में शून्य कमी रही। 303 स्टेशनों में से 47 बंद/प्रतिबंधित रहे।
कोर्ट ने मंगलवार तक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। इस बीच मेट्रो सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले (अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था की शर्त के अधीन)। किसी भी अधिवक्ता को पेशेवर कर्तव्य निभाने में बाधा न पहुंचाई जाए। शहर में इंटरनेट सुविधा बहाल रहे।
ये मामले मुख्य रूप से अवमानना याचिका जिसमें शुक्रवार के आदेश के बावजूद मेट्रो प्रतिबंध जारी रखने का आरोप और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं से जुड़े हैं।
आपको बता दें रिट पिटीशन (सिविल) एमए बेबी बनाम भारत संघ एवं अन्य तथा रिट पिटीशन (क्रिमिनल) में शुक्रवार को सुनवाई हुई थी । शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुनवाई में दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 70 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी पत्रों में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर आने वाली मेट्रो ट्रेनों और सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को "संवेदनशील स्थानों की ओर उग्र भीड़ की आवाजाही के संभावित खतरे" को देखते हुए संचालन बंद करने या रद्द करने के निर्देश का विरोध किया गया था। नई दिल्ली में शनिवार को इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी। गृह मंत्रालय ने जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के आसपास 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित रखने की मंजूरी दी थी।
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