जाति जनगणना का आंकड़ा बेकार हो जाएगा! विपक्ष नेताओं ने मोदी सरकार को चेताया | पढें पूरी खबर

'ओबीसी की सही गिनती नहीं होगी…' : खड़गे-राहुल ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने  संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। पत्र में लिखा कि एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान OBC, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। पत्र में लिखा कि एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान OBC, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।
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दिल्ली- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि सरकार द्वारा अपनाया गया ओपन-एंडेड प्रश्न वाला तरीका भ्रामक है, जिसमें हर व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा वही दर्ज कर लिया जाएगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। ऐसे में एक ही जाति के लोग अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे तो एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और देश में लाखों जातियों के नाम निकल आएंगे। इससे हासिल पूरा आंकड़ा अनुपयोगी हो जाएगा।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जब किसी समुदाय की सही संख्या ही दर्ज नहीं होगी तो उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन भी गलत होगा। इसका सबसे बड़ा नुकसान पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों को होगा। शिक्षा, रोजगार, योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जनगणना में “पिछड़ा वर्ग” शब्द तक शामिल नहीं है, इसलिए यह भी पता नहीं चलेगा कि भारत में ओबीसी की आबादी कितनी है।

जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति

खड़गे और गांधी ने समाधान सुझाते हुए कहा है कि जातियों की एक ड्रॉप-डाउन सूची बनाई जाए। अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना में यही तरीका अपनाया जाता है। यह सूची मौजूदा सरकारी सूचियों जैसे सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग सूची और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर आसानी से तैयार की जा सकती है। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी यही तरीका अपनाया गया था। पत्र के साथ दोनों राज्यों की जाति सूचियां भी संलग्न की गई हैं।

दोनों नेताओं ने मांग की है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द की जाए। राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक बातचीत कर नई प्रश्नावली तैयार की जाए ताकि हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आए और जाति जनगणना सटीक, सार्थक तथा लाभकारी हो। खड़गे ने सोशल मीडिया पर भी इस पत्र का जिक्र करते हुए लिखा कि जाति जनगणना सिर्फ होनी नहीं चाहिए, सही भी होनी चाहिए।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने  संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। पत्र में लिखा कि एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान OBC, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा।
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