पुणे में MPSC आंदोलनकारियों पर मुकदमे, वंचित बहुजन आघाड़ी ने कहा- यह सरकार की मगरूरी!

मामले में प्रमोद पाटील, अक्षय कांबळे, ऋषिकेश गांगुर्डे, प्रियंका चौधरी समेत कुल 15 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।
MPSC चेयरमैन के इस्तीफ़े और छात्रों की मांगों को लेकर पुणे में 9 दिनों से सत्याग्रह चल रहा है और 6 प्रतिनिधि पिछले 6 दिनों से आमरण अनशन पर हैं।
MPSC चेयरमैन के इस्तीफ़े और छात्रों की मांगों को लेकर पुणे में 9 दिनों से सत्याग्रह चल रहा है और 6 प्रतिनिधि पिछले 6 दिनों से आमरण अनशन पर हैं।
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पुणे- पुणे के एस.एम. जोशी पुल पर एमपीएससी छात्रों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन के बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाय उन पर केस दर्ज कर आंदोलन दबाने का प्रयास करने पर फडणवीस सरकार का वंचित बहुजन आघाड़ी, महाराष्ट्र प्रदेश की ओर से तीव्र विरोध जताया गया है।

पुणे शहर के विश्रामबाग पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर दिनांक 9 अक्टूबर के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 189(2), 189(3), 189(5), 126(2), 223, 270 और 292 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37(1)(c), 135, 112 और 117 के अंतर्गत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इस मामले में प्रमोद पाटील, अक्षय कांबळे, ऋषिकेश गांगुर्डे, प्रियंका चौधरी समेत कुल 15 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।

वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने कहा कि एमपीएससी परीक्षाओं में हुए कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के आरोप, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता और आयोग के कामकाज को लेकर छात्रों के सामने आए मामले गंभीर हैं। छात्रों के भविष्य से जुड़े इन सवालों की पारदर्शी जांच कर जिम्मेदारी तय करना सरकार का कर्तव्य है। लेकिन छात्रों ने अपनी मांगों के लिए आंदोलन किया तो उन पर केस दर्ज होना लोकतंत्र में विरोध की आवाज दबाने का प्रयास और सरकार की मगरूरी है।

उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय मांगने का अधिकार है। उनके सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें आपराधिक कार्रवाई के डर में रखना उचित नहीं है। छात्रों के सवालों पर चर्चा कर समाधान निकालने के बजाय उन पर कानून का डंडा चलाना सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

वंचित बहुजन आघाड़ी ने मांग की है कि:

  • छात्रों पर दर्ज किए गए मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

  • MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा दें।

  • परीक्षाओं में पेपर लीक, अनियमितताओं और छात्रों की मांगों की जांच की जाए।

  • छात्रों की सभी मांगों पर सरकार तुरंत फैसला लेकर उन्हें न्याय दे।

पातोडे ने कहा कि छात्र देश और महाराष्ट्र का भविष्य हैं। उनके भविष्य के साथ खेलने का अधिकार किसी भी सरकार को नहीं है। छात्रों के सवालों की अनदेखी या उन पर केस दर्ज कर यह मुद्दा खत्म नहीं होगा। सरकार दमन का रास्ता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाए, अन्यथा इसके दुष्परिणाम सरकार को भुगतने पड़ेंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास न करें, वरना सरकार को छात्रों के रोष का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने छात्र आंदोलन का समर्थन करने वाले विधायकों और सांसदों से अपील की कि वे अब पुणे में नहीं बल्कि मुंबई में मुख्यमंत्री के दफ्तर जाकर आंदोलन शुरू करें। साथ ही यह भी कहा कि छात्र आंदोलन करते समय सिर्फ पुणे जाकर आंदोलन हाईजैक न हो, इसकी सावधानी बरतें और उपोषण कर रहे छात्रों तथा उनकी मांगों पर आंदोलन आगे बढ़ना चाहिए।

क्यों कर रहे हैं युवा आन्दोलन

पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के छात्रों का आंदोलन और प्रदर्शन 1 अक्टूबर प्रमुख स्थलों जैसे एस.एम. जोशी ब्रिज, लाल बहादुर शास्त्री रोड और तिलक/अल्का चौक) पर चल रहा है। युवाओं की मुख्य मांगों में MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं की जांच और भर्ती में देरी को दूर करना आदि शामिल है।

परीक्षा पैटर्न (वर्णनात्मक यानी Descriptive बनाम बहुविकल्पीय यानी MCQ) को लेकर छात्रों के अलग-अलग समूह अलग-अलग मांगें रख रहे हैं, जिससे छात्रों का आंदोलन कुछ धड़ों में विभाजित भी हुआ है। आन्दोलन के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MPSC के कामकाज और अध्यक्ष की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की सिफारिश राज्यपाल से की है। रोहित पवार (एनसीपी शरद गुट), आदित्य ठाकरे, सुप्रिया सुले और राज ठाकरे जैसे कई राजनेताओं ने आंदोलन स्थलों का दौरा कर छात्रों की मांगों का समर्थन किया है।

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