
बरेली- गणतंत्र दिवस के ठीक बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक विद्रोह का नया अध्याय सामने आया। निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार दोपहर बरेली कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। समर्थकों के साथ DM अविनाश सिंह से मिलने पहुंचे अलंकार को अंदर घुसने नहीं दिया गया, तो उन्होंने गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। नारेबाजी के बीच वे DM के कमरे के ठीक सामने पहुंचे और 'UGC काला कानून वापस लो', 'ब्राह्मणों पर अत्याचार बंद करो' जैसे नारे लगाए। यह सब कुछ दोपहर 1 बजे के आसपास हुआ, जब अनेक ब्राह्मण संगठनों के कार्यकर्ता उनके साथ जुट गए। पुलिस ने गेट बंद कर दिया।
अलंकार ने धरने के दौरान कहा, "कल रात DM आवास पर मुझे 45 मिनट तक बंधक बनाए रखा गया। लखनऊ से किसी ने DM को फोन कर मुझे 'पागल पंडित' कहा – वह शख्स कौन है? DM नाम बताएं, वरना धरना जारी रहेगा।" उन्होंने केंद्र सरकार से SIT जांच की मांग की और कहा, "अगर प्रशासन ही साधुओं को पीटेगा, तो समाज में गलत संदेश जाएगा।" समर्थकों ने भी नारे लगाए – 'अलंकार जिंदाबाद', 'UGC ब्लैक लॉ वापस लो'। ब्राह्मण महासभा और अन्य संगठनों के नेता भी मौके पर पहुंचे, जिससे माहौल गरम हो गया।
43 वर्षीय अलंकार 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं, जिन्होंने पहली ही कोशिश में 15वीं रैंक हासिल की। कानपुर के रहने वाले अलंकार ने पिता की मौत के बाद परिवार संभाला और B.Tech व LLB के बाद सिविल सेवा में कदम रखा। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के तौर पर वे सख्ती और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते थे।
यह सब 26 जनवरी से शुरू हुआ, जब गणतंत्र दिवस पर अलंकार ने 5 पेज का इस्तीफा दिया। उन्होंने केंद्र की UGC इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को 'काला कानून' करार दिया, जो 13 जनवरी को नोटिफाई हुआ। इन नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत पूर्वाग्रह की जांच और SC/ST/OBC छात्रों के लिए हेल्पलाइन का प्रावधान है। अलंकार का आरोप है कि "यह ब्राह्मण विद्वानों को निशाना बनाएगा, संस्कृत-वेदिक स्टडीज को खत्म कर देगा। सामान्य वर्ग के छात्रों का उत्पीड़न होगा।"
इसी बीच, प्रयागराज माघ मेले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों को कथित तौर पर 'चोटी खींचकर घसीटने और मारपीट' का मामला सामने आया। अलंकार ने इसे 'एंटी-ब्राह्मण कैंपेन' का हिस्सा बताया और UP सरकार पर राष्ट्रपति राज लगाने की मांग की। इस्तीफे के बाद वे 'गायब' हो गए, लेकिन बाद में DM आवास पर 'हाउस अरेस्ट' का दावा किया। रातोंरात सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर शामली DM कार्यालय से अटैच किया। जांच बरेली मंडल आयुक्त को सौंपी गई।
धरना अभी जारी है, पुलिस हाई अलर्ट पर है। अगर दोषी साबित हुए, तो बर्खास्तगी हो सकती है। लेकिन अलंकार की बगावत UP प्रशासन में सनसनी फैला रही है। UGC नियमों को लेकर बढ़ते गतिरोध के बीच भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर ने एक बयान जारी किया जिसमे नये नियमों को समर्थन देते हुए उन्होने लिखा, " उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का विरोध—अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के अधिकारों के संदर्भ में—किया जाना सामाजिक न्याय के विरुद्ध एक भ्रामक एवं संगठित प्रयास है, जो अत्यंत चिंताजनक है। जबकि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर—विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा दिव्यांगजनों—या इनमें से किसी भी वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव का उन्मूलन करना तथा सभी हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को सुनिश्चित करना है। उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन करने के उद्देश्य लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का भीम आर्मी - आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूर्ण समर्थन करती है। "
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