
उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे यूपी पुलिस के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) पोर्टल पर पोस्टमार्टम सहित सभी मेडिको-लीगल रिपोर्ट समय पर अपलोड करना सुनिश्चित करें। अदालत ने इसके साथ ही इन रिपोर्ट्स को 'मेडलेपआर' (MedLEaPR) प्रणाली के साथ तुरंत जोड़ने और संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस कार्य के प्रति संवेदनशील बनाने की भी अपेक्षा की है।
यह महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने 24 अक्टूबर को पारित अपने एक आदेश में दिए हैं। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी एक साथ बैठकर इस प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकालें।
अधिकारियों की सहमति के बाद, कोर्ट ने 4 नवंबर को सुबह 11 बजे चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव के कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है। इस बैठक में सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपाय तय किए जाएंगे।
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को दिए गए एक पूर्व आदेश के क्रम में आगे बढ़ाई गई थी। 24 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस सुनवाई के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी अदालत के समक्ष पेश हुए। इनमें नई दिल्ली एनआईसी के उप महानिदेशक शशिकांत शर्मा, यूपी पुलिस के एडीजी (तकनीकी) भगवान एस श्रीवास्तव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी और मेडलेपआर टीम के प्रमुख राहुल जैन शामिल थे।
इसके अलावा प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी और स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस प्रभारी डॉ. राजीव रंजन भी सुनवाई में मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान एनआईसी के अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि सीसीटीएनएस और मेडलेपआर को आपस में जोड़ने की पूरी व्यवस्था तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग से एफआईआर या केस क्राइम नंबर से जुड़े अनुरोध प्राप्त होने के बाद पोर्टल पर पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल रिपोर्ट आसानी से अपलोड की जा सकती हैं।
हालांकि, इस दौरान डॉ. राजीव रंजन ने एक हैरान करने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 15 मई 2025 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच प्रयागराज में कुल 3,707 पोस्टमार्टम किए गए, लेकिन पुलिस ने सीसीटीएनएस के जरिए केवल दो मामलों में ही रिपोर्ट प्राप्त करने का अनुरोध भेजा।
अदालत द्वारा इस भारी अंतर का कारण पूछे जाने पर एडीजी (तकनीकी) ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को एफआईआर से जुड़े अनुरोध सीधे अस्पतालों और मुर्दाघरों में भेजने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कुछ तकनीकी खामियों के कारण अनुरोध भेजने की प्रक्रिया बाधित हुई थी।
वहीं, एनआईसी के शशिकांत शर्मा ने निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया कि थानों से अनुरोध मिलते ही अस्पतालों से तुरंत मेडिको-लीगल रिपोर्ट भेजी जाएंगी।
सभी अधिकारियों के बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने उम्मीद जताई कि समय पर रिपोर्ट भेजने और सीसीटीएनएस के साथ इसके एकीकरण से जुड़े सभी मुद्दों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने ये निर्देश प्रयागराज की जैरुन निशा द्वारा दहेज हत्या के एक मामले में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए हैं, जिसे अदालत द्वारा निस्तारित किया जा चुका है।
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