नई दिल्ली। सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 बैच के सफल उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर से जुड़ा मामला लंबित होने के बावजूद, इन अधिकारियों की सीनियॉरिटी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह स्पष्ट किया है कि भले ही अभी तक उम्मीदवारों के सर्विस आवंटन और फाउंडेशन कोर्स को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है, लेकिन उनके करियर की वरिष्ठता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के अधिकारियों ने इस पूरी स्थिति पर अपना रुख एकदम साफ कर दिया है। उनका कहना है कि विभाग के साथ-साथ सभी संबंधित प्रशिक्षण संस्थान पूरी तरह से मुस्तैद हैं। लक्ष्य यही है कि बिना कोई अतिरिक्त समय गंवाए CSE-2025 के उम्मीदवारों को तेजी से सेवाएं आवंटित की जाएं और उनके फाउंडेशन कोर्स की जल्द से जल्द शुरुआत की जा सके।
अधिकारियों ने सफल उम्मीदवारों की सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए एक बेहद अहम बात कही है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि फाउंडेशन कोर्स के शुरू होने में जो भी देरी हो रही है, उसका उम्मीदवारों की सीनियॉरिटी, ग्रेडेशन या सेवा की अन्य किसी भी शर्त पर कोई भी नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
यह पूरा स्पष्टीकरण 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक 'रोहित नाथन' फैसले के बाद उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए जारी किया गया है। उस अहम फैसले में सर्वोच्च अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि किसी भी श्रेणी के ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 'क्रीमी लेयर' का क्राइटेरिया तय करते समय 'वेतन' (सैलरी) को 'आय' (इनकम) में नहीं जोड़ा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन उम्मीदवारों के लिए भी लागू होता है, जिनके माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) या बैंकों आदि में कार्यरत हैं। दरअसल, यह पूरा विवाद इसी बात से जुड़ा था कि पिछले कई सालों से पीएसयू बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को 'क्रीमी लेयर' की श्रेणी में रख दिया जाता था, क्योंकि नियमों की गलत व्याख्या करते हुए उनके माता-पिता की आय में वेतन को भी शामिल कर लिया जाता था।
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