आगामी यूपी विधानसभा चुनाव, संसद में महिला आरक्षण, जातिगत जनगणना और बहुजन समाज के प्रतिनिधित्व जैसे तमाम ज्वलंत मुद्दों पर कांग्रेस ओबीसी विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिंद ने द मूकनायक के साथ बेबाकी से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब केवल राजनीतिक सत्ता नहीं, बल्कि देश में सामाजिक और आर्थिक बराबरी की एक बड़ी लड़ाई लड़ रही है। डॉ. जयहिंद ने मनुवादी व्यवस्था से लेकर भाजपा की राजनीति और राहुल गांधी के विजन पर विस्तार से अपनी बात रखी।
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती और मान्यवर कांशीराम के ऐतिहासिक योगदान को डॉ. जयहिंद ने खुले तौर पर स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिदृश्य में सामाजिक न्याय के लिए सड़क से लेकर संसद तक केवल एक ही शख्सियत मजबूती से संघर्ष कर रही है, और वह हैं राहुल गांधी। उनका मानना है कि सामाजिक न्याय की चाह रखने वाली तमाम ताकतें और विचारधाराएं अब स्वाभाविक रूप से कांग्रेस और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एकजुट होंगी।
उत्तर प्रदेश में राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाए जाने को कांग्रेस का एक बड़ा और स्पष्ट संदेश बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय के रास्ते पर चल पड़ी है। सवर्णों और दलितों को 'साधने' की राजनीति को उन्होंने भाजपा की 'पेटी पॉलिटिक्स' (तुच्छ राजनीति) करार दिया। डॉ. जयहिंद ने कहा कि कांग्रेस स्टेट्समैनशिप में विश्वास रखती है, जहां नीतियां 140 साल पुराने उस विजन पर बनती हैं जिसमें गरीब, शोषित और वंचित समाज का सीधा हित हो। यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ 200 से अधिक सीटों पर दावेदारी के सवाल पर उन्होंने गौतम की भावना से सहमति जताई, लेकिन अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ा।
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण के सवाल पर डॉ. जयहिंद ने एक बेहद व्यापक दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर की चंद नौकरियों में आरक्षण मिलना केवल 'दो इंच जमीन' मिलने जैसा है, जबकि बहुजन समाज को पूरे आसमान की दरकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर भागने वालों में कोई दलित या पिछड़ा नहीं होता, तो दुनिया की फॉर्च्यून 500 कंपनियों के मालिक दलित, आदिवासी या ओबीसी क्यों नहीं हो सकते। कांग्रेस का लक्ष्य केवल छोटी नौकरियां देना नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में देश की 88 प्रतिशत हाशिए पर पड़ी आबादी की समान हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।
राम मंदिर और यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के मंदिर जाने के घटनाक्रम पर डॉ. जयहिंद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम पूरे ब्रह्मांड के कण-कण में मौजूद हैं, इसलिए उनके दर्शन के लिए किसी एक विशेष मंदिर में जाने की व्यक्तिगत रूप से कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने भाजपा पर राम के नाम का राजनीतिकरण करने और मंदिर को धन कमाने का जरिया बनाने का गंभीर आरोप लगाया। डॉ. जयहिंद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस एक पूरी तरह से सेक्युलर पार्टी है, जहां आर्य समाजी से लेकर बौद्ध धर्म मानने वाले (जैसे राजेंद्र पाल गौतम) हर विचारधारा के लोगों का सम्मान है और यही भारत की असली खूबसूरती है।
समाज में दलितों पर होने वाले उत्पीड़न, जिसमें ओबीसी वर्ग के लोगों की भी संलिप्तता देखी जाती है, उस पर डॉ. जयहिंद ने गहरा कटाक्ष किया। पेशे से डॉक्टर होने के नाते उन्होंने इस सामाजिक बीमारी का 'डायग्नोसिस' करते हुए इसके लिए सीढ़ीनुमा मनुवादी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में हर व्यक्ति अपने पायदान पर खड़े होकर अपने से ऊपर वाले के पैर चाटता है और नीचे वाले को लात मारता है। डॉ. जयहिंद ने जोर देकर कहा कि जिस तरह देश से पोलियो और चेचक का उन्मूलन हुआ, उसी तरह कांग्रेस का लक्ष्य इस मनुवाद और जातिवाद को जड़ से जलाकर खाक करना है।
हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर बात करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग सहित तमाम संवैधानिक संस्थाओं के हाईजैक होने का आरोप लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 90 लाख वोटरों के नाम काटे जाने का हवाला देते हुए मौजूदा चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि न्यायपालिका का रवैया भी निराशाजनक है। वहीं, संसद में महिला आरक्षण पर डॉ. जयहिंद ने कांग्रेस के रुख को बिल्कुल स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी साफ तौर पर कह चुके हैं कि ओबीसी, दलित और आदिवासी महिलाओं के लिए 'कोटा के भीतर कोटा' अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
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