वर्धा विवि: FIR के बाद 6 दलित-पिछड़े छात्रों पर प्रवेश प्रतिबंध, सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास

छात्र बोले- "संवाद नहीं, दमन"
आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि दमन, प्रतिबंध और FIR से छात्रों की शैक्षणिक मांगें समाप्त नहीं होंगी।
आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि दमन, प्रतिबंध और FIR से छात्रों की शैक्षणिक मांगें समाप्त नहीं होंगी।
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वर्धा- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा में शैक्षणिक एवं छात्रहित की विभिन्न मांगों को लेकर 8 जुलाई से जारी छात्र सत्याग्रह के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह आंदोलनकारी छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर एवं हॉस्टल में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। छात्रों का आरोप है कि संवाद और मांगों के समाधान के बजाय प्रशासन पहले FIR और अब प्रतिबंध के माध्यम से आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही सत्याग्रह स्थल को जबरन खाली कराने के लिए सुरक्षा कर्मियों को भेजे जाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

प्रतिबंधित छात्रों में शोधार्थी निरंजन ओबेरॉय (OBC), शोधार्थी राजेश कुमार यादव (OBC), विद्यार्थी राहुल कुमार (OBC), शोधार्थी राम चन्द्र (SC), विद्यार्थी राकेश अहिरवार (SC) और विद्यार्थी शिवपूजन पासी (SC) शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि इन सभी पर विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े विवादों के दौरान FIR दर्ज की गई हैं और अब उन्हीं छात्रों को परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया है। छात्रों के अनुसार संबंधित FIR अभी जांच की प्रक्रिया में हैं; ऐसे में किसी व्यक्ति को अपराधी मानकर उसके शैक्षणिक अधिकारों पर रोक लगाना न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

आंदोलनकारी छात्र राजेश ने कहा कि “हमारी मांगों का जवाब देने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को अपराधी की तरह पेश कर रहा है। पहले FIR, फिर विश्वविद्यालय और हॉस्टल में प्रतिबंध और अब सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास, यह छात्र समस्याओं के समाधान का रास्ता नहीं, बल्कि असहमति को दबाने की कोशिश है। विश्वविद्यालय को पुलिस और सुरक्षा के सहारे छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनके साथ सार्वजनिक संवाद करना चाहिए।”

छात्रों ने यह भी मांग की है कि विद्यार्थियों को अपराधीकरण करने संबंधी कार्रवाई और भाषा पर विश्वविद्यालय प्रशासन अपना स्पष्टीकरण दे तथा विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के संबंध में जारी सभी पत्र एवं आदेश विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।
छात्रों ने यह भी मांग की है कि विद्यार्थियों को अपराधीकरण करने संबंधी कार्रवाई और भाषा पर विश्वविद्यालय प्रशासन अपना स्पष्टीकरण दे तथा विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के संबंध में जारी सभी पत्र एवं आदेश विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।

स्त्री अध्ययन विभाग के शोधार्थी राम चन्द्र, 2021 बैच, ने 24 अगस्त को रामनगर पुलिस थाने में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा और कार्यकारी कुलसचिव कादर नवाज खान के विरुद्ध जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न तथा पूर्व में आवंटित छात्रावास उपलब्ध नहीं कराने संबंधी लिखित शिकायत दी थी।

राम चन्द्र का आरोप है कि उन्हें पिछले लगभग आठ महीनों से आवंटित छात्रावास उपलब्ध नहीं कराया गया और इसके कारण उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अपने साथ जातिगत भेदभाव एवं मानसिक उत्पीड़न किए जाने का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच संबंधित सक्षम संस्थाओं द्वारा की जानी है।

राम चन्द्र ने कहा कि “मैं अपने अधिकारों और छात्रावास की न्यायसंगत मांग को लेकर पिछले 20 अगस्त से सत्याग्रह पर बैठा हूं। अब मुझे और मेरे साथियों को विश्वविद्यालय परिसर से ही प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा सत्याग्रह स्थल से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन को हमारे आरोप गलत लगते हैं तो वह संवाद और निष्पक्ष जांच का रास्ता अपनाए, दमन का नहीं।”

2022 से लंबित PhD प्रवेश प्रक्रिया और बुनियादी सुविधाओं की मांग

छात्रों के अनुसार आंदोलन की प्रमुख मांगों में 2022-23 से लंबित PhD प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करना तथा 2026 तक की लंबित PhD प्रवेश प्रक्रिया को नियमित रूप से शुरू करना, विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में स्त्री अध्ययन एवं फिल्म अध्ययन विभागों का संचालन, 24 घंटे केंद्रीय पुस्तकालय एवं रीडिंग रूम की सुविधा, छात्रावास में समुचित व्यवस्था एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, पर्याप्त पानी, दवा, स्वच्छता तथा अन्य बुनियादी छात्र सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।

छात्रों ने बताया कि PhD प्रवेश प्रक्रिया को लेकर कई विद्यार्थियों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। लगभग तीन वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय के आदेश के पश्चात 27 अगस्त 2026 को PhD 2022-23 की साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी हुई, जिसे छात्र अपने लंबे संघर्ष का परिणाम बता रहे हैं।

छात्रों की मांग: प्रतिबंध वापस लेकर लिखित समाधान दे प्रशासन

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छहों छात्रों पर लगाया गया विश्वविद्यालय एवं हॉस्टल प्रवेश प्रतिबंध तत्काल वापस लेने, उनकी सभी शैक्षणिक सुविधाएं बहाल करने, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR के वापस ली जाए, सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास बंद करने, कार्यकारी कुलसचिव कादर नवाज पर लगे आरोपों की जांच की जाए, स्थाई कुलसचिव की नियुक्ति की जाए तथा सभी लंबित शैक्षणिक एवं छात्रहित की मांगों पर स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध आदेश जारी करने की मांग की है।

छात्रों ने यह भी मांग की है कि विद्यार्थियों को अपराधीकरण करने संबंधी कार्रवाई और भाषा पर विश्वविद्यालय प्रशासन अपना स्पष्टीकरण दे तथा विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के संबंध में जारी सभी पत्र एवं आदेश विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।

आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि दमन, प्रतिबंध और FIR से छात्रों की शैक्षणिक मांगें समाप्त नहीं होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को टकराव बढ़ाने के बजाय तत्काल संवाद, निष्पक्ष जांच और लिखित समाधान की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि दमन, प्रतिबंध और FIR से छात्रों की शैक्षणिक मांगें समाप्त नहीं होंगी।
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