15 दिन की चेतावनी बेअसर: वर्धा विश्वविद्यालय में छात्र संघर्ष जारी, कल आर्वी नाका से स्टूडेंट्स निकालेंगे मार्च

वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने 28 सितंबर के ‘शिक्षण अधिकार बचाव मोर्चा’ में शामिल होने की घोषणा की है।
10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। छात्रों के अनुसार समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।
10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। छात्रों के अनुसार समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।
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वर्धा- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में दलित-ओबीसी छात्रों के अधिकार, शैक्षणिक न्याय, परिसर में प्रवेश और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन 82वें दिन भी जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ यह आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। वर्धा जिलाधिकारी कार्यालय के पास गांधी प्रतिमा के समक्ष सड़क पर चल रहा छात्रों का धरना भी 25वें दिन में पहुंच गया है।

आंदोलनरत छात्रों और वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने 10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। स्त्री अध्ययन विभाग के शोधार्थी राजेश कुमार यादव ने बताया कि अल्टीमेटम की समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के चलते 28 सितंबर को ‘चलो वर्धा विश्वविद्यालय’ का आह्वान किया गया है।

10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। छात्रों के अनुसार समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।
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छात्रों की प्रमुख मांगें हैं कि छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं और उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाए। इसके अलावा 20 अगस्त के आंदोलन को लेकर किसी भी छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन, विश्वविद्यालय की पूर्व शैक्षणिक एवं विभागीय व्यवस्था बहाल करने तथा प्रशासनिक अनियमितताओं और वित्तीय मामलों से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र जांच की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। विशेष रूप से कादर नवाज के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग जोरदार तरीके से उठाई जा रही है।

छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से उठाई जा रही शैक्षणिक और मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन ने विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर और प्रवेश प्रतिबंध जैसी कार्रवाई की। उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन संवाद और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए समस्याओं का समाधान करता, तो स्थिति इस स्तर तक नहीं पहुंचती।

आंदोलनकारियों के अनुसार यह मार्च केवल छह छात्रों की एफआईआर और प्रवेश प्रतिबंध का मुद्दा नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार, समान अवसर, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है।
आंदोलनकारियों के अनुसार यह मार्च केवल छह छात्रों की एफआईआर और प्रवेश प्रतिबंध का मुद्दा नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार, समान अवसर, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है।

वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने 28 सितंबर के ‘शिक्षण अधिकार बचाव मोर्चा’ में शामिल होने की घोषणा की है। अपने एक्स हैंडल पर जारी संदेश में उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए बेहतर मेस सुविधा, स्वच्छ पेयजल, बंद किए गए पाठ्यक्रमों को दोबारा शुरू करने तथा विद्यार्थियों को पूर्व में स्वीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों के जवाब में छह दलित-बहुजन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया। 10 सितंबर को दिए गए 15 दिन के चेतावनी के बावजूद मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने 28 सितंबर के मोर्चे में शामिल होने की घोषणा की है।

28 सितंबर को सुबह 11 बजे आर्वी नाका से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय तक मार्च निकाला जाएगा। आंदोलनकारियों ने देशभर के छात्र संगठनों, आंबेडकरवादी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक संगठनों और जनपक्षधर नागरिकों से वर्धा पहुंचने की अपील की है।

आंदोलनकारियों के अनुसार यह मार्च केवल छह छात्रों की एफआईआर और प्रवेश प्रतिबंध का मुद्दा नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार, समान अवसर, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है।

छात्रों की पांच प्रमुख मांगें हैं:

  1. छह छात्रों की एफआईआर वापस लेना

  2. प्रवेश प्रतिबंध हटाना

  3. 20 अगस्त के आंदोलन को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई न करना

  4. पूर्व शैक्षणिक एवं विभागीय व्यवस्था बहाल करना

  5. कादर नवाज के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराना

आंदोलनरत छात्रों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से यदि अब भी कोई निर्णायक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी गई है।

10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। छात्रों के अनुसार समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।
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10 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का चेतावनी नोटिस दिया था। छात्रों के अनुसार समयसीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन छह दलित-ओबीसी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाने सहित प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।
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