
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में छात्रों के लगातार हो रहे उत्पीड़न, छह दलित एवं ओबीसी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने तथा विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावास में उनके प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी क्रम में आंदोलनरत छात्रों ने 28 सितंबर को “चलो हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा” का राष्ट्रीय आह्वान किया है।
आंदोलनरत छात्रों ने देशभर के छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों तथा जनवादी नागरिकों से अपील की है कि वे 28 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में वर्धा पहुंचकर छात्रों के आंदोलन के समर्थन में आवाज बुलंद करें।
आंदोलनरत छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं।
छह दलित एवं ओबीसी छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर एवं छात्रावास में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश को तत्काल रद्द किया जाए।
आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ दमनात्मक अथवा उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद की जाए।
दलित शोधार्थी रामचंद्र द्वारा जातिगत भेदभाव के संबंध में की गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
दलित-बहुजन छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव एवं उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए।
छात्रों की संवैधानिक एवं शैक्षणिक मांगों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर लिखित जवाब दिया जाए तथा लंबित मांगों के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
स्त्री अध्ययन विभाग के शोधार्थी राजेश सारथी बताते हैं कि विश्वविद्यालय में बुनियादी शैक्षणिक एवं छात्रहित से जुड़ी सुविधाओं और अधिकारों की मांग उठाने के कारण छात्रों के साथ लगातार भेदभाव एवं उत्पीड़न किया जा रहा है। छात्र 3 सितंबर से वर्धा कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास गांधी पुतला स्थल पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं।
इससे पहले छात्र 8 जुलाई से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि उनकी मांगों पर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन पर मिथ्या आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई तथा बाद में 1 सितंबर से विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावास में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।
छात्रों का यह भी कहना है कि आंदोलन समाप्त करने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, वर्धा पुलिस द्वारा आंदोलनरत छात्रों को दो नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें आंदोलन स्थल से हटने तथा आंदोलन जारी रखने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इसके बावजूद आंदोलनरत छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जातीं, प्रवेश एवं छात्रावास प्रतिबंध समाप्त नहीं किया जाता और उनकी संवैधानिक एवं शैक्षणिक मांगों पर ठोस लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनरत छात्रों ने देशभर के छात्र-युवा संगठनों, सामाजिक-राजनीतिक संगठनों, जनवादी नागरिकों और लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील की है कि वे 28 सितंबर को वर्धा पहुंचकर छात्रों के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में एकजुट हों।
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