Rajasthan: वित्त विभाग के तुगलकी आदेश से हड़कंप; पे-प्रोटेक्शन के नाम पर सैकड़ों शिक्षकों से वसूली!

सियाराम संगठन ने की नाराज़गी जताई
ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों के  राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं ।
ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों के राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं ।एआई चित्र
Published on

बांसवाड़ा। राजस्थान सरकार के वित्त विभाग द्वारा 2 जून को जारी आदेश के तहत ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों जोकि बाद में राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं । इस हेतु शिक्षा विभाग में ब्लॉक स्तर पर मंत्रालयिक कर्मचारियों और वित्त विशेषज्ञों की ज़ाँच समिति गठित कर हर शिक्षक की सर्विस बुक की सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जा रहा हैं जिससे शिक्षकों में हड़कंप ओर रोष व्याप्त हैं। 

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने पूर्ववर्ती तिथियों से वेतन विसंगतियों के नाम पर तुगलगी आदेशों पर ज्ञापन भेज कर पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई है।

सियाराम संगठन के प्रदेश प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने बताया कि ऐसे निकायों PSUs/Autonomous Bodies पंचायत समिति,नगर निगम आदि के कर्मचारी सरकारी सेवक Government Servants नहीं माने जाते हैं, वे यदि आगे वे सीधी भर्ती से सरकारी नौकरी में आते हैं, तो पुरानी जगह पर मिलने वाले उनके आखिरी वेतन (Last Pay Drawn) को राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 और 26 के तहत सुरक्षित पे प्रोटेक्शन नहीं किया जाएगा। उन्हें सरकारी सेवा में नए सिरे से तय वेतन ही मिलेगा।

संगठन का मानना है कि शिक्षक कर्मचारी को वेतन श्रृंखला ओर वेतन वित्त विशेषज्ञों द्वारा अनुमोदित किया जा कर ही आहरण वितरण अधिकारियों द्वारा कोष कार्यालय द्वारा पारित कर दिया जाता हैं जोकि विधि सम्मत विभागीय नियमानुसार होता है। इसमें वर्षों बाद मीनमेख निकाल कर वेतन विसंगतियों के नाम पर जबरन दबाव बना कर वसूली की जा रही हैं और न्यायिक निर्णयों में अपील की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जांचों के नाम फिक्सेशन करने वाले वित्त विशेषज्ञों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं जो कि चिन्ताजनक है।

राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि अगर हाई कोर्ट का कोई ऐसा फैसला आता भी है, तो विभाग उसे सीधे लागू नहीं कर सकते। सबसे पहले उस फैसले की समीक्षा प्री-लिटिगेशन कमेटी (Pre-Litigation Committee) द्वारा की जाएगी। 

उसके बाद वित्त विभाग (Finance Department) की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा, चाहे उस फैसले के खिलाफ अपील करनी हो या उसे लागू करना हो

यह आदेश दोबारा क्यों जारी करना पड़ा?

वित्त विभाग ने पहले भी 1 सितंबर 2025 को ऐसा ही आदेश जारी किया था।

इसके बावजूद, कई प्रशासनिक विभागों ने हाई कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देकर कर्मचारियों को पे-प्रोटेक्शन दे दिया। वित्त विभाग ने इस पर नाराजगी जताई है कि विभागों ने कोर्ट के आदेशों को लागू करने की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा भीलवाड़ा,सभाध्यक्ष ललित आर पाटीदार, नवीन जोशी, अरुण व्यास,अशोक शर्मा, नानू राम डामोर, डाया लाल यादव, बदन लाल डामोर श्रीपाल जैन महिपाल भुता,नवीन कुमार शर्मा,रामदयाल मीणा सहित कई पीड़ित शिक्षक सम्मिलित है।

ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों के  राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं ।
RPSC की सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती में SC/ST/OBC की 67 सीटें कम, सामाजिक कार्यकर्ता बोले- 'दलितों-आदिवासियों का हक मारा'
ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों के  राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं ।
राजस्थान में सफाई कर्मियों की भर्ती: 5 साल संविदा शर्त पर वाल्मीकि समुदाय बोला- सरकार ही 2.5 साल की बची, वादा कौन निभाएगा?
ओटो नोमस बॉडीज में कार्यरत कार्मिकों के  राजकीय सेवा में आने पर उनकी पुरानी वेतन श्रृंखला जो परिवीक्षा काल में दी गई थी, से हजारों रुपए की वसूली निकाली जा रही हैं ।
Rajasthan: संविदा भर्ती पर बढ़ा विवाद, 3540 पदों को लेकर युवाओं और गेस्ट फैकल्टी में रोष

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com