राजस्थान में सफाई कर्मियों की भर्ती: 5 साल संविदा शर्त पर वाल्मीकि समुदाय बोला- सरकार ही 2.5 साल की बची, वादा कौन निभाएगा?

सरकारी नौकरियों के 2 वर्ष के प्रोबेशन पीरियड बनाम पांच वर्ष की संविदा से कोर्ट में चुनौती की संभावना है, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया अटक सकती है।
सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है।
सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है।ग्राफिक- आसिफ निसार/द मूकनायक
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जयपुर: राजस्थान सरकार द्वारा 25,000 सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए लाई जा रही नई नीति पर वाल्मीकि समुदाय और सफाई मजदूर संगठनों में तीव्र आक्रोश फैल गया है। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भजनलाल सरकार रोजगार देने के नाम पर युवाओं को पांच वर्ष तक संविदा पर रखने की तैयारी कर रही है, जो बेरोजगार युवाओं और विशेष रूप से वाल्मीकि समाज के साथ अन्याय है जबकि नए सरकारी नौकरियों का प्रोबेशन पीरियड 2 वर्ष का होता है जिससे विसंगति के आधार पर यह मामला कोर्ट में चला जाएगा और भर्ती अधरझूल में अटक जाएगी और 5 वर्ष वाला नियम वाल्मीकि समाज के साथ में बहुत बड़ा धोखा होगा।

जाड़ावत ने चेतावनी दी, “रोजगार का अधिकार युवाओं का हक है, कोई एहसान नहीं। पांच साल तक संविदा की शर्त लगाकर सरकार युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रही है। वाल्मीकि समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हम हर स्तर पर आवाज उठाएंगे।”

जाड़ावत के बाद अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस, जोधपुर के जिलाध्यक्ष सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे समुदाय के साथ खुला अन्याय बताया है।

द मूकनायक से बातचीत में सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने कहा, “सरकार का यह कदम समुदाय के साथ बड़ा अन्याय है। जब सरकार ही मात्र 2.5 साल की बची है, तब संविदा पर 5 साल की भर्ती करके बाद में स्थायी करना हास्यप्रद है। सरकार स्वयं संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है।”

सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है। इसलिए सरकार को भर्ती नीति बनाते समय वाल्मीकि समाज की भावनाओं, अनुभव और हितों का विशेष ध्यान रखना चाहिए अन्य समाज सफाई कार्य को निपुणता से नहीं कर पायेंगें।
— सुरेंद्रसिंह जाड़ावत, पूर्व राज्यमंत्री

5 साल का संविदा प्रोबेशन क्यों बेतुका?

स्वायत्त शासन विभाग राजस्थान कॉन्ट्रैक्टुअल रिक्रूटमेंट रूल्स, 2022 के तहत यह भर्ती कर रहा है। नई नीति के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को पहले पांच वर्ष तक संविदा पर काम करना होगा। इस दौरान फिक्स्ड वेतन मिलेगा और पांच वर्ष बाद उनके कार्य प्रदर्शन, अनुशासन व जिम्मेदारियों के मूल्यांकन के आधार पर ही स्थायी नियुक्ति दी जाएगी।

वाल्मीकि समाज वर्षों से कठिन परिस्थितियों में नगरों-शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी रहा है। नई नीति में किसी विशेष समुदाय को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। केवल सामान्य आरक्षण नीति लागू होगी।

वाल्मीकि नेता इस प्रावधान को पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण मानते हैं। विद्रोही ने सवाल किया कि जब सरकार का अपना कार्यकाल ही ढाई साल बचा है, तो पांच साल बाद स्थायी करने का वादा कैसे पूरा होगा? उन्होंने इसे बेरोजगार युवाओं के साथ धोखा बताया।

सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने सरकार से मांग की है कि युवाओं को स्थायी रोजगार का विश्वास दिलाया जाए और वाल्मीकि समाज की पारंपरिक भूमिका का सम्मान किया जाए।
सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने सरकार से मांग की है कि युवाओं को स्थायी रोजगार का विश्वास दिलाया जाए और वाल्मीकि समाज की पारंपरिक भूमिका का सम्मान किया जाए।द मूकनायक

वाल्मीकि समुदाय सदियों से सफाई कार्य का मुख्य आधार रहा है। भर्ती में समुदाय की निपुणता और अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है।

सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने जोधपुर का उदाहरण देते हुए कहा, “नगर निगम में कुल 3500 सफाई कर्मी हैं, लेकिन वास्तव में करीब 1600 ही फील्ड में काम कर रहे हैं। बाकी शेष कार्यालयों में लग गए हैं। सामान्य वर्ग के पास राजनीतिक पहुंच होती है, वे पार्षदों-नेताओं की सिफारिश लगाकर ऑफिस में चले जाते हैं। फील्ड में बेचारे वाल्मीकि समुदाय के कर्मी तपती धूप और गर्मी में सुबह 6:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक गंदगी साफ करने में जुटे रहते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “आरक्षण का हम सम्मान करते हैं, लेकिन आरक्षण से गैर-वाल्मीकि अभ्यर्थी भर्ती हो जाते हैं और कुछ समय बाद वे ऑफिस में लग जाते हैं। असली मैला-मूत्र और गंदगी साफ करने का काम फिर सिर्फ वाल्मीकि समुदाय के पास रह जाता है। बाबा साहब ने हमें जहां से उठाया था, वही आज की मनुवादी सरकारों ने हमें पटक दिया है।”

समुदाय का कहना है कि भर्ती में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी नौकरी पाने के बाद   राजनीतिक पहुंच और पार्षदों-नेताओं की सिफारिश लगाकर ऑफिस में चले जाते हैं। फील्ड में बेचारे वाल्मीकि समुदाय के कर्मी खपने को मजबूर होते हैं।
समुदाय का कहना है कि भर्ती में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी नौकरी पाने के बाद राजनीतिक पहुंच और पार्षदों-नेताओं की सिफारिश लगाकर ऑफिस में चले जाते हैं। फील्ड में बेचारे वाल्मीकि समुदाय के कर्मी खपने को मजबूर होते हैं। द मूकनायक

भर्ती प्रक्रिया का विवादास्पद इतिहास

पिछले पांच वर्षों में सफाई कर्मियों की भर्ती दो बार रद्द हो चुकी है। कांग्रेस सरकार के समय 13,184 पदों की भर्ती 2023 में वापस ली गई। भाजपा सरकार के समय 23,820 पदों की भर्ती अगस्त 2024 में रद्द की गई। विवाद मुख्य रूप से अनुभव प्रमाण-पत्र, जाली दस्तावेजों और पात्रता मानदंडों को लेकर थे। वाल्मीकि संगठनों ने प्राथमिकता की मांग की थी। सरकार ने भर्तियों में कर्मचारी संगठनों और स्थानीय निकायों से सुझाव लिए थे।

स्वायत्त शासन विभागीय सचिव रवि जैन ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष समुदाय को अतिरिक्त प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। भर्ती राजस्थान की मौजूदा आरक्षण नीति के तहत होगी।

वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारी संगठन अब इस नीति के खिलाफ राज्य स्तर पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने कहा की इस मुद्दे पर शीघ ही प्रदर्शन और मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा।

सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है।
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सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है।
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