
नई दिल्ली- जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान सोमवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का दूसरा दिन रहा। इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और मीडिया पर तीखे सवाल उठाए, जबकि सोनम वांगचुक ने आंदोलन को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का जवाब देते हुए सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। सोशल मीडिया पर उनके अनशन के दौरान चिकन सूप पीने के दावों को लेकर फैली अफवाहों पर वांगचुक ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस स्टील की बोतल को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, उसमें केवल पानी था।
सोमवार को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मीडिया और लोगों के सामने विवादित स्टील की बोतल दिखाई। उन्होंने बोतल का पानी एक पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल में डालकर दिखाया और कहा कि उसमें केवल साधारण पानी था।
इसके बाद सोनम वांगचुक ने अफवाहों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इस शासन में हर चीज़ टेबल के नीचे होती है, इसलिए लोगों को लगा कि इस बोतल में भी कुछ छिपा होगा। अगर मुझे कुछ लेना ही होता, तो क्या मैं अनशन के पहले ही दिन ऐसा करता?"
उन्होंने कहा कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए इस तरह की भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं और लोगों को अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए।
भूख हड़ताल के दूसरे दिन वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है।
उन्होंने मशहूर शेर पढ़ते हुए कहा,
"इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या।"
इसके बाद उन्होंने कहा, "यह अब ऑनलाइन आंदोलन नहीं रहा। लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। सरकार को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए। अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो लोग अपनी नाराज़गी जताने के दूसरे रास्ते तलाशेंगे। प्रदर्शनकारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाइए, जनता आपका साथ देगी।"
वांगचुक ने मुख्यधारा के मीडिया से आंदोलन की कवरेज करने की अपील करते हुए कहा कि समाचार चैनलों में काम करने वाले लोग भी इस आंदोलन की भावना को समझते हैं।
उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी सहयोग की अपेक्षा जताई और कहा कि "स्विट्जरलैंड की पुलिस प्रदर्शनकारियों को धूप से बचाने के लिए सनस्क्रीन तक उपलब्ध कराती है। दिल्ली पुलिस को भी प्रदर्शनकारियों के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। हम आपके बच्चों के भविष्य के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।"
आंदोलन स्थल पर मौजूद डॉ. नितिन दिघे ने बताया कि भूख हड़ताल के दूसरे दिन सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है। उनके अनुसार वांगचुक का ब्लड प्रेशर 117/71, पल्स रेट 89 प्रति मिनट और ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि डॉ. दिघे ने दिल्ली की भीषण गर्मी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस मौसम में धरने पर बैठे रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
भूख हड़ताल के दूसरे दिन CJP ने इसे केवल शिक्षा और जवाबदेही का मुद्दा नहीं बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का प्रश्न बताते हुए सरकार से वार्ता शुरू करने की मांग दोहराई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की उस कार्रवाई की आलोचना की जिसमें आंदोलन में चाय वितरित करने वाले स्वयंसेवक अनिकेत के घर रात में पुलिस पहुंची थी।
दिपके ने कहा, " क्या इस देश में एक ही चायवाला हो सकता है? हमारे चायवाले से मत उलझो। क्या पता वह कल प्रधानमंत्री बन जाए। दिल्ली में हर दिन गंभीर अपराध होते हैं, लेकिन पुलिस के पास छात्रों के समर्थन में चाय बांटने वाले एक युवक के घर जाने का समय है।"
उन्होंने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन में सहयोग कर रहे नागरिकों को डराने का प्रयास बताया।
दिपके ने सभी राजनीतिक दलों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की, लेकिन स्पष्ट किया कि वे केवल राष्ट्रीय ध्वज के साथ ही आएं।
उन्होंने कहा, "जंतर-मंतर पर आपका स्वागत है। लेकिन पार्टी का झंडा नहीं, केवल तिरंगा लेकर आइए।"
CPI(M) के जनरल सेक्रेटरी एम.ए. बेबी और सीनियर लीडर वृंदा करात ने सोमवार को जंतर-मंतर विजिट किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और NEET पेपर लीक के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे छात्र-युवा आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया।
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