स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना करने के आरोप में निलंबित शिक्षक को राहत; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश किया स्थगित

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करना उचित नहीं होगा। शिक्षक अपने बचाव में अस्पताल में भर्ती होने, चिकित्सकीय अवकाश और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात विभागीय जांच के दौरान रख सकते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले के एक शिक्षक के निलंबन आदेश को विभागीय जांच पूरी होने तक फिलहाल स्थगित रखने का निर्देश दिया है। शिक्षक पर आरोप है कि उनके प्रभारी प्रधानाध्यापक रहने के दौरान स्कूल में छात्र इस्लामिक प्रार्थना कर रहे थे और ऐसी वर्दी पहन रहे थे, जिससे उनके एक विशेष समुदाय से संबंधित होने का संकेत मिलता था। हालांकि, कोर्ट ने इन आरोपों की सत्यता पर इस स्तर पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

यह आदेश हाईकोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने पारित किया। याचिका में शिक्षक ने संभल के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 10 मई 2026 को जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्हें उस अवधि में प्रभारी प्रधानाध्यापक रहते हुए निलंबित किया गया, जब छात्रों द्वारा कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना किए जाने और विशेष समुदाय को दर्शाने वाली वर्दी पहनने के आरोप लगाए गए हैं।

शिक्षक के वकील ने दलील दी कि संबंधित अवधि में शिक्षक अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें स्वीकृत चिकित्सकीय अवकाश मिला हुआ था। याचिका में इसका विवरण और अवकाश से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए थे।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि वे उन प्रार्थना सेवाओं के दौरान स्कूल में मौजूद नहीं थे, जब छात्रों द्वारा कथित गतिविधियां की जा रही थीं।

सरकार ने क्या कहा?

19 अगस्त को हुई सुनवाई में राज्य और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया था। इसके बाद 7 सितंबर को विभाग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 3 सितंबर 2026 का आरोप-पत्र 7 सितंबर को ही शिक्षक को दे दी गई है।

विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि आरोप-पत्र के साथ कुछ रिकॉर्ड लगाए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि 14 नवंबर 2025 से पहले शिक्षक को छात्रों द्वारा की जा रही कथित प्रार्थना के दौरान देखा गया था। रिकॉर्ड में यह भी उल्लेख था कि छात्र ऐसी वर्दी में थे, जिससे उनके एक विशेष समुदाय से संबंधित होने का संकेत मिलता था।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करना उचित नहीं होगा। कोर्ट के अनुसार, शिक्षक अपने बचाव में अस्पताल में भर्ती होने, चिकित्सकीय अवकाश और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात विभागीय जांच के दौरान रख सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के दौरान शिक्षक को अपनी बेगुनाही साबित करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि शिक्षक के खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच को कानून के अनुसार जल्द से जल्द और अधिमानतः 15 दिनों के भीतर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि विभागीय जांच पूरी होने तक 10 मई का निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। निलंबन आदेश को जांच पूरी होने तक स्थगित रखा जाएगा और उसका भविष्य जांच के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि शिक्षक से संबंधित सभी प्रासंगिक दस्तावेज तीन दिनों के भीतर उन्हें उपलब्ध कराए जाएं।

अदालत ने इस स्तर पर न तो शिक्षक को दोषी माना और न ही उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार घोषित किया। मामले में आरोपों और शिक्षक द्वारा दिए जाने वाले बचाव पर अंतिम निर्णय विभागीय जांच के परिणाम के बाद होगा।

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