चुनाव जीतीं लेकिन साढ़े चार साल तक अधिकारों से रहीं वंचित: जानिए तमिलनाडु की एक दलित महिला पंचायत अध्यक्ष के साथ क्या-क्या बीती

31 अगस्त को मलरविझी अपनी याचिका लेकर विल्लुपुरम कलेक्ट्रेट पहुँचीं और खुद को आग लगाने की कोशिश की।
कोडुंगल पंचायत अध्यक्ष मलरविझी 2021 में चुनी गई थी लेकिन उनका आरोप है कि दलित होने के कारण उन्हें साढ़े चार साल तक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्हें काम करने, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और दफ्तर की चाबियाँ संभालने और चेक पर दस्तखत की अनुमति तक नहीं दी गई थी।
कोडुंगल पंचायत अध्यक्ष मलरविझी 2021 में चुनी गई थी लेकिन उनका आरोप है कि दलित होने के कारण उन्हें साढ़े चार साल तक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्हें काम करने, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और दफ्तर की चाबियाँ संभालने और चेक पर दस्तखत की अनुमति तक नहीं दी गई थी।
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विल्लुपुरम- पंचायत अध्यक्ष चुनी जाने के बावजूद कुर्सी, दफ्तर की चाबी, झंडा फहराने और चेक पर दस्तखत जैसे अधिकार न मिलने का आरोप लगाने वाली एक दलित महिला इन दिनों चर्चा में हैं। तमिलनाडू के विल्लुपुरम जिले की कोडुंगल पंचायत की अध्यक्ष मलरविझी अनुसूचित जाति से हैं और 2021 में चुनी गई थीं। उनका आरोप है कि उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने नहीं दिया गया, कार्यालय में प्रवेश और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोका गया और प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल में बाधा डाली गई।

जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए मलारविझी का कहना है कि उन्हें  लगभग साढ़े चार साल तक पंचायत से जुड़े कामों में हिस्सा लेने से भी रोका गया। खुद के साथ ऐसे व्यवहार से आहत होकर उन्होंने 31 अगस्त को विल्लुपुरम कलेक्टरेट में खुद को आग लगाने की कोशिश की।  पुलिस ने उन्हें खुद को आग लगाने से रोक दिया, जिसके बाद उन्हें कलेक्टर को अपनी अर्जी देने की इजाज़त दी गई।

क्या है पूरा मामला?

मलरविझी 2021 में पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। उनका आरोप है कि उनके पति को जानने वाले एक स्थानीय DMK पदाधिकारी कथावरायन ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए राज़ी किया था। वे शुरू में हिचकिचा रही थीं, पर बाद में आगे बढ़ीं। उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है। पंचायत अध्यक्ष होने के बावजूद चेक पर दस्तखत का अधिकार न मिलने से वे अपने कर्तव्य नहीं निभा पा रही थीं। उन्हें किनारे कर दिया गया और पंचायत के सार्वजनिक कार्यों पर दूसरे लोगों ने कब्ज़ा कर लिया।

TNM की एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार मलरविझी ने तहसीलदार से शिकायत की कि उन्हें काम करने, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और दफ्तर की चाबियाँ संभालने नहीं दिया जा रहा, और चेक पर दस्तखत की अनुमति माँगी। लगभग साढ़े चार साल के लगातार भेदभाव के बाद उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने दिया गया, दफ्तर की चाबियाँ मिलीं और उन्होंने तिरंगा फहराया। लेकिन चेक पर दस्तखत का अधिकार और प्रस्ताव पारित कराने की माँग तब भी अटकी रही।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मलारविझी ने उपाध्यक्ष मुनियाम्मल और उनके भाई कथवरायन पर आरोप लगाया कि वे अन्य निर्वाचित सदस्यों पर अपने प्रभाव से उनके स्वतंत्र फैसलों में बाधा डालते हैं।

वे जब भी अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहतीं, उन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटाने की धमकी दी जाती थी। उनके नेतृत्व में हुए सार्वजनिक कार्यों के भुगतान रोक लिए गए।

शिकायतों पर कार्रवाई की जगह अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें आरोपियों से "एडजस्ट" करने की सलाह दी। उनका यह भी आरोप है कि मनरेगा से जुड़े काम में 10 लाख रुपये से ज़्यादा के कथित कमीशन के लिए उन पर दबाव डाला गया।

31 अगस्त को मलारविझी अपनी याचिका लेकर विल्लुपुरम कलेक्ट्रेट पहुँचीं और खुद को आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने इससे पहले ही हस्तक्षेप कर लिया और उसके बाद उन्हें जाँच की माँग वाली एक और याचिका देने दी गई। उन्होंने अधिकार बहाल करने, पूरे हो चुके कामों का भुगतान जारी करने और भेदभाव, धमकी व दखलंदाज़ी के आरोपियों की जाँच की माँग की है। ज़िला कलेक्टर शेख अब्दुल रहमान ने कहा कि ज़िला प्रशासन ने उन्हें चेक पर दस्तखत की शक्ति दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत भेदभाव के उचित सबूत देने पर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस मामला दर्ज कर कार्रवाई करेंगे।

इससे पहले भी तमिलनाडू में जातिगत भेदभाव के मामले

2022: तमिलनाडु अनटचेबिलिटी इरेडिकेशन फ्रंट (TNUEF) के सर्वे में, 24 जिलों में किए गए सर्वे में कई दलित पंचायत अध्यक्षों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक की अनुमति नहीं मिली। IANS की रिपोर्ट के अनुसार सर्वे किए गए 386 पंचायतों में से 22 में दलित अध्यक्षों को कुर्सी नहीं दी गई।

2020: तिरुवल्लूर के आत्तुपाक्कम गाँव में अनुसूचित जाति की अध्यक्ष वी. अमृतम को स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने से रोका गया, फिर पाँच दिन बाद कलेक्टर और SP की मौजूदगी में उन्होंने झंडा फहराया। उपाध्यक्ष के पति और पंचायत सचिव को गिरफ्तार किया गया।

तेरकु तिट्टै गाँव: अध्यक्ष एस. राजेश्वरी की ज़मीन पर बैठी तस्वीर वायरल होने के बाद उपाध्यक्ष और सचिव पर SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ।

महाराष्ट्र में दलित महिला सरपंच से राजनीतिक रंजिश में कर दी पति की हत्या

दलित महिला सरपंच के साथ भेदभाव के मामले केवल तमिलनाडू तक ही सीमित नहीं है, महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के परवा गांव में 2018 में सरपंच के पति की हत्या का एक चर्चित मामला हुआ था। अप्रैल 2015 में, बौद्ध (दलित) समुदाय से ताल्लुक रखने वाली नलिनी महेश गावंडे परवा ग्राम पंचायत की सदस्य चुनी गईं। इसके बाद जनवरी 2016 में तत्कालीन सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद नलिनी गावंडे सामान्य सीट से सरपंच बन गईं।

गांव के कुछ रसूखदार और ऊंचे वर्ग के लोगों को एक दलित महिला का सामान्य सीट से सरपंच बनना नागवार गुजरा। इसी राजनीतिक और जातिगत रंजिश के चलते गांव के दूसरे गुट के साथ उनका विवाद गहरा गया। इस रंजिश के परिणामस्वरूप 2018 में सरपंच नलिनी गावंडे के पति महेश गावंडे की गांव में ही दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना से पूरे यवतमाल जिले में हड़कंप मच गया था।

कोडुंगल पंचायत अध्यक्ष मलरविझी 2021 में चुनी गई थी लेकिन उनका आरोप है कि दलित होने के कारण उन्हें साढ़े चार साल तक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्हें काम करने, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और दफ्तर की चाबियाँ संभालने और चेक पर दस्तखत की अनुमति तक नहीं दी गई थी।
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