संत रविदास जयंती | मायावती का तीखा हमला: बसपा ने संत रविदास जिला बनाया, सपा ने हटाया, भाजपा ने बहाल नहीं किया

"राजनीतिक दल संतों के नाम पर वोट बैंक के लिए दिखावा करते हैं, अनुयायियों की उपेक्षा आज भी जारी"
मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए।
मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए।
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लखनऊ- रविवार को संतगुरु श्री रविदास जयंती पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम मायावती ने श्रद्धांजलि अर्पित की और देश-दुनिया भर में बसे उनके करोड़ों अनुयायियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मायावती ने कहा कि संत रविदास जी का अमर संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी प्रासंगिक है, जो मन की शुद्धता, पाक-साफ़ी और इंसानियत पर जोर देता है। उन्होंने जोर दिया कि केवल शुद्ध मन से ही व्यक्ति सच्चा सुख प्राप्त कर सकता है और समाज व देश का कल्याण कर सकता है।

एक बयान में मायावती ने कहा, "संत रविदास, जो वाराणसी में छोटी समझी जाने वाली जाति में जन्मे थे, लेकिन प्रभु-भक्ति और कर्म के बल पर ब्रह्माकार हुए। वे आजीवन जाति-भेदभाव, कुरीतियों और द्वेष के खिलाफ कड़ा संघर्ष करते रहे। उनका मूल संदेश था कि मानव जाति एक है, सभी को समान समझकर प्रेम से रहना चाहिए। जाति-पाति मानवता के विकास में सबसे बड़ा बाधक है।" मायावती ने कहा कि संत रविदास जी ने सामाजिक परिवर्तन और मानवतावादी मूल्यों की अलख जगाई, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए। लेकिन आज इस संदेश को भुला देने के कारण अमन-चैन, भाईचारा और सुख-समृद्धि प्रभावित हो रही है। कई नेता और पार्टियां केवल वोटों के लालच में संतों के जन्मदिन पर उनके स्थलों पर जाकर दिखावा और नाटकबाजी करती हैं, जबकि दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के अनुयायियों के प्रति उपेक्षा और तिरस्कार आज भी जारी है।

मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए।
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बीएसपी प्रमुख ने कांग्रेस, बीजेपी और सपा पर आरोप लगाया कि पहले ये पार्टियां इन महान संतों-गुरुओं की उपेक्षा करती थीं, लेकिन बहुजन समाज के जागरूक और संगठित होने से अब वोट बैंक के लिए दिखावा करती हैं। ऐसे जातिवादी तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है।

मायावती ने बीएसपी सरकार के दौरान संत रविदास के सम्मान में किए गए कार्यों का विस्तार से जिक्र किया:

1. भदोही को नया संत रविदास जिला घोषित करना (सपा सरकार ने जातिवादी द्वेष से नाम बदल दिया, भाजपा सरकार ने अब तक बहाल नहीं किया – यह अति दुखद है और इन पार्टियों की एक जैसी सोच दर्शाता है)।

2. वाराणसी में संत रविदास पार्क और घाट की स्थापना।

3. फैजाबाद (अब अयोध्या) में संतगुरु रविदास राजकीय महाविद्यालय का निर्माण।

4. वाराणसी में संत रविदास जी की प्रतिमा स्थापना।

5. संत रविदास सम्मान पुरस्कार की शुरुआत।

6. चंदौली में संत रविदास पॉलिटेक्निक, वाराणसी में एस.सी./एस.टी. प्रशिक्षण संस्थान।

7. गंगा नदी पर पुल का नाम संत रविदास रखना।

8. बदायूं में संत रविदास धर्मशाला हेतु सहायता, बिल्सी में प्रतिमा स्थापना आदि।

मायावती ने कहा कि ये सभी कार्य बीएसपी सरकार ने बिना किसी मांग के अपनी पहल पर किए। बीएसपी ही संत रविदास जी के उपदेशों को आगे बढ़ा रही है। आज के संकीर्ण और द्वेषपूर्ण माहौल में उनके मानवतावादी संदेश का बहुत महत्व है। शासक वर्ग को मन चंगा करके शुद्ध भाव से काम करना चाहिए, ताकि समाज और देश बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की कल्पना के अनुसार सुखी और समृद्ध हो सके।

मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए।
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मायावती ने राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश समाज सेवा, जनचेतना और इंसानियत की भलाई के लिए है, न कि राजनीतिक या चुनावी स्वार्थ के लिए।
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