बेंगलुरु- कर्नाटक हाईकोर्ट ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर और गृह मंत्री प्रियंक खरगे पर फेसबुक के जरिए कथित जातिवादी टिप्पणी करने वाले आरोपी की याचिका खारिज कर दी है। आरोपी ने अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट रद्द कराने की मांग की थी। अदालत ने याचिका को "न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग" बताते हुए याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया है।
यह आदेश 2 नवंबर को जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की एकल पीठ ने सुनाया। याचिकाकर्ता महेशा के.सी. उर्फ महेश गौड़ा मांड्या तालुक के कब्बनहल्ली निवासी हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता सनत कुमार के.एम. ने पैरवी की। आरोप है कि महेश गौड़ा ने फेसबुक पर एक पोस्ट प्रकाशित की, जिसमें डॉ. अंबेडकर और गृह मंत्री प्रियंक खरगे की जाति को लेकर टिप्पणी की गई। शिकायत के अनुसार, महेश ने मंत्री की जाति का भी जिक्र किया और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के प्रति उनके सम्मान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंबेडकर का जन्म भी उसी जाति में हुआ था। इस पर मैसूरु के साउथ पुलिस स्टेशन में क्राइम नंबर 131/2025 दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने मैसूरु की VI अतिरिक्त जिला एवं विशेष न्यायाधीश की अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जो स्पेशल केस नंबर 336/2025 के रूप में लंबित है।
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352, 238 और 241 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r), (s) और (u) धाराओं में आरोप हैं। शिकायत प्रतिवादी संख्या 2 एस. विजयकुमार ने दर्ज कराई थी। वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े कंपोजर हैं और मैसूरु तालुक के बंदीपाल्या गांव के निवासी हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि शिकायत एक राजनीतिक दल के सदस्य ने फेसबुक पर कथित रूप से प्रकाशित सामग्री के आधार पर दर्ज कराई है। उनका कहना था कि जिस व्यक्ति का नाम कथित पोस्ट में लिया गया है, उसने स्वयं कोई शिकायत नहीं की है, इसलिए शिकायतकर्ता को शिकायत दर्ज कराने का कोई अधिकार (locus) नहीं है।
राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोजक एम.वी. अनूप कुमार ने दलील दी कि फेसबुक पोस्ट गृह मंत्री प्रियंक खरगे की जाति और डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जाति के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में पुलिस द्वारा जांच करना और चार्जशीट दाखिल करना पूरी तरह उचित है।
अदालत ने शिकायत की सामग्री का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह याचिका "न्यायालय की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग" है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यवाही रद्द करने के लिए एक भी आधार नहीं बनता। इसके उलट, चार्जशीट की सामग्री से साफ संकेत मिलता है कि मामले में ट्रायल होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया। यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), मैसूरु को अदा करनी होगी। आदेश में यह भी कहा गया कि यदि जुर्माना जमा नहीं किया गया, तो DLSA मैसूरु इसे सिविल कोर्ट की डिक्री की तरह याचिकाकर्ता से वसूलने की कार्रवाई करेगा। याचिका खारिज होने के बाद अब मैसूरु की विशेष अदालत में स्पेशल केस नंबर 336/2025 की सुनवाई जारी रहेगी।
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