हल्द्वानी में खरगे की सभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ | कांग्रेस अध्यक्ष बोले- "दलित होने से मुझे छुआछूत का एहसास कराया", नड्डा बोले- जांच कराएंगे

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा-'अगर खरगे जी का अपमान होता है, तो यह सबका अपमान है।' इसके बाद खरगे ने कहा-यह संविधान का अपमान है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि वह दलित हैं, इसलिए उनकी रक्षा की जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि वह दलित हैं, इसलिए उनकी रक्षा की जाए।
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हल्द्वानी- उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त की  ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ आयोजन हुआ जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने रामलीला मैदान में हवन-पूजन और ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया। संगठन ने इसका कारण मैदान के धार्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप और कांग्रेस की सभा के दौरान लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों को बताया। कांग्रेस ने इसे खरगे की दलित पहचान से जोड़ते हुए जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता का मामला बताया है।

विवाद अब संसद तक पहुंच चुका है। राज्यसभा में खरगे ने खुद इस मुद्दे को उठाया और कहा कि इस घटना से उन्हें ‘Untouchability’ यानी छुआछूत का एहसास कराया गया और उनका अपमान हुआ। उन्होंने मांग की कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ छुआछूत संबंधी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा-'अगर खरगे जी का अपमान होता है, तो यह सबका अपमान है।' इसके बाद खरगे ने कहा-यह संविधान का अपमान है। दूसरी ओर, राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराई जाएगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में पार्टी की एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। यह कार्यक्रम उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस के राजनीतिक अभियान का हिस्सा था। खरगे ने सभा में राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए थे।

सभा के दो दिन बाद, 10 अगस्त को रामलीला मैदान में श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने हवन और ‘शुद्धिकरण’ का आयोजन किया। आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ।

खरगे ने राज्य सभा में मुद्दे को उठाते हुए कहा “मैं हल्द्वानी गया था, जहां मैंने रामलीला मैदान में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार के मुद्दे उठाए।”

इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद भाजपा से जुड़े लोगों ने मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए हवन किया। खरगे ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई होती है और संविधान की रक्षा कैसे की जा रही है।

खरगे ने यह भी कहा कि वह इस घटना को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखना चाहते। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि वह दलित हैं, इसलिए उनकी रक्षा की जाए।

“मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मैं दलित हूं, मेरी रक्षा करो और न ही किसी के सामने गिड़गिड़ाया। मुझमें लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूं लेकिन हल्द्वानी में स्टेज का शुद्धिकरण कर मुझे Untouchability का एहसास कराया गया और मेरा अपमान किया गया। मेरी माँग है — हल्द्वानी में जिन लोगों ने स्टेज का शुद्धिकरण किया, उन पर Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएँ।
-मल्लिकार्जुन खरगे

गुरूवार को मीडिया से बात करते हुए खरगे ने कहा, "हम पहले से कहते आ रहे हैं कि इस देश में दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। आखिर वहाँ 'हवन' की क्या ज़रूरत थी? हल्द्वानी, उत्तराखण्ड के रामलीला मैदान में हर पार्टी के लोग जनसभा करते हैं, लेकिन वहाँ जो किया गया, वह हिंदू धर्म के खिलाफ़ है। इससे यह भी साफ होता है कि BJP के लोग देश को बाँटने और जातियों के बीच झगड़ा कराने का काम कर रहे हैं।"

कांग्रेस ने शुद्धिकरण की कार्रवाई को खरगे की दलित पहचान से जोड़कर देखा है।

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि जिस मंच से कांग्रेस अध्यक्ष ने जनता को संबोधित किया, उसी मंच का ‘शुद्धिकरण’ कराया जाना जातिगत भेदभाव को दर्शाता है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए नैनिताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले में संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस का आरोप है कि शुद्धिकरण की कार्रवाई को केवल धार्मिक-सांस्कृतिक कारण बताना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह आयोजन खरगे की सभा के ठीक बाद हुआ और खरगे स्वयं इसे अपने साथ हुए अपमान तथा छुआछूत के अनुभव के रूप में देख रहे हैं।

भाजपा ने क्या कहा?

श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े गिरीश चंद्र पांडे ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए है और इसे राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि खरगे की सभा के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए जो उसके अनुसार आपत्तिजनक थे। संगठन के मुताबिक, इन्हीं कारणों से मंच और स्थल का ‘शुद्धिकरण’ किया गया।

राज्यसभा में खरगे के आरोप के बाद सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना पर खेद जताया।

नड्डा ने कहा कि खरगे ने जो बात कही है, वह कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि सभी के लिए दुखद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।

नड्डा ने कहा कि “भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती” और उन्होंने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि खरगे की भावनाएं आहत हुई हैं, यह सभी के लिए खेद का विषय है। इस तरह भाजपा ने एक तरफ घटना की निंदा की, वहीं उत्तराखंड भाजपा ने शुद्धिकरण करने वाले संगठन से पार्टी के संबंध से इनकार किया है।

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