
चूरू - राजकीय विधि महाविद्यालय चूरू में तृतीय सेमेस्टर की LL.B छात्रा मीना मेघवाल (30) ने प्राध्यापिका अपूर्वा शर्मा और प्राध्यापक अनिल पर जातिगत द्वेष रखते हुए अपमानजनक शब्द बोलने, धमकी देने और जानबूझकर फेल करने का आरोप लगाया है। छात्रा ने 27 फरवरी को कोतवाली थाना चूरू में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने तुरंत SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1) (r) एवं 3(1) (s) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
शिकायतकर्ता मीना मेघवाल, पिता टोरूराम मेघवाल, निवासी खारीया (थाना मलसीसर, जिला झुंझुनू) ने रिपोर्ट में बताया कि वे राजकीय विधि महाविद्यालय चूरू में LL.B तृतीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। दिसंबर 2025 में महाविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने एक प्रश्न पूछा तो प्रोफेसर अपूर्वा शर्मा नाराज हो गईं। छात्रा के अनुसार, अपूर्वा शर्मा ने सभी छात्र-छात्राओं के सामने उन्हें “चमारी” और “नीची जाति की हो, तुम LL.B नहीं कर सकतीं, यह तुम्हारा काम नहीं है” जैसे जातिगत अपशब्द कहे और फेल करने की धमकी दी। इस घटना के समय महाविद्यालय में आकाश दीप, आकाश मिश्रा, हिमांशु, प्रेम प्रकाश सहित कई छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
छात्रा ने आगे आरोप लगाया कि इसके बाद अपूर्वा शर्मा लगातार उन्हें जलील करती रहीं और प्रैक्टिकल परीक्षा में 20 में मात्र 6 अंक देकर फेल कर दिया, जबकि अन्य विषयों में अन्य प्राध्यापकों ने 12-13अंक दिए। 21 फरवरी को जब मीना ने फेल होने का कारण पूछा तो अपूर्वा शर्मा ने कथित तौर पर कहा, “मेरी मर्जी है, मैंने कर दिया। तुम लोग नीची जाति के हो।” छात्रा ने कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मामला धारा 3(1)(r) (s) SC/ST एक्ट के अंतर्गत आता है। थाना प्रभारी ने रिपोर्ट को FIR 44/2025 के रूप में दर्ज कर मूल रिपोर्ट और प्रति आगे की जांच हेतु वृत चूरू के RPS सुनील कुमार झाझड़िया को भेज दी है।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा है। BAMCEF से जुड़े पत्रकार नवीन कुमार नंदन ने X पर FIR की फोटो सहित पोस्ट किया और लिखा, “अगर आरोप सही हैं तो बहुत खतरनाक है।” स्थानीय सूत्रों के मुताबिक प्राध्यापक अपूर्वा शर्मा के कॉलेज प्रिंसिपल के साथ भी व्यवहार अच्छे नहीं है। एक दो छात्रों से बात करने पर उन्होंने भी बताया कि आरोपी टीचर परीक्षा समय में अनुसूचित जाति के छात्रों को कॉलेज प्रवेश द्वार पर उनके एडमिट कार्ड के भी हाथ नहीं लगाती थी।
समाज के छात्र अटेंडेंस कम भेजने व प्रैक्टिकल में कम नंबर भेजने के डर से मुंह नहीं खोलना चाहते। पीडिता के साथ जातिय ट्रॉचर किया गया है तभी इतनी बात बढ़ी है। बताया जाता है मीना एक गरीब परिवार से है और वह होनहार और परिवार की पहली विधि छात्रा है।
अभी तक महाविद्यालय प्रशासन या आरोपी शिक्षकों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले की जांच जारी है। यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दी है। आगे की जांच में सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
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