तेहरी गढ़वाल 'ऑनर किलिंग': नाबालिग बेटी का दलित दोस्त खटका तो पिता और दादा ने घर बुलवाकर किया टॉर्चर; कीलें ठोकी, नाखून उखाड़ा!

केतन के परिवार का आरोप है कि दोनों युवकों को पहले से घात लगाकर पकड़ लिया गया, फिर एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद पूरी रात उन्हें डंडों, बेल्टों और अन्य वस्तुओं से पीटा गया। केतन को विशेष रूप से बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
लड़की का परिवार केतन के साथ उसकी दोस्ती से नाखुश था।
लड़की का परिवार केतन के साथ उसकी दोस्ती से नाखुश था। (Instagram)
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तेहरी गढ़वाल- उत्तराखंड के तेहरी गढ़वाल जिले से एक खौफनाक वारदात सामने आई है, जहां एक सवर्ण जाति की नाबालिग से दोस्ती करने के आरोप में एक 18 वर्षीय दलित छात्र की नृशंस पिटाई कर हत्या कर दी गई। मामला सामाजिक बहिष्कार और कथित 'ऑनर किलिंग' की ओर इशारा करता है। मृतक की पहचान केतन लाल (18) के रूप में हुई है, जो प्रतापनगर ब्लॉक के देवल गांव का रहने वाला था और कक्षा 12 का छात्र था। केतन के साथ गए उसके दोस्त दिवाकर डिमरी (22) को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।

परिवार के अनुसार, केतन की पड़ोस के खोलगढ़ गांव की एक नाबालिग लड़की से दोस्ती थी। दोनों करीब छह माह से फोन पर संपर्क में थे। लड़की के परिजन इस दोस्ती से इसलिए नाखुश थे क्योंकि केतन दलित समुदाय से आता था। पुलिस को दी शिकायत में परिजनों ने बताया कि लड़की के परिजनों ने उसपर दबाव बनाकर रविवार रात केतन को मिलने के लिए अपने गांव बुलाने को मजबूर किया।

रविवार देर रात करीब 11:30 बजे केतन अपने दोस्त दिवाकर के साथ मोटरसाइकिल से खोलगढ़ गांव पहुंचा। केतन के परिवार का आरोप है कि दोनों युवकों को पहले से घात लगाकर पकड़ लिया गया, फिर एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद पूरी रात उन्हें डंडों, बेल्टों और अन्य वस्तुओं से पीटा गया। केतन को विशेष रूप से बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। उसके नाखून उखाड़कर, पैरों में कीलें ठोकने और गुप्तांगों पर गंभीर चोट पहुंचाने समेत अमानवीय यातनाएं दी गई थीं।

आरोपियों ने ही खुद परिजनों को फोन कर बुलाया और कहा कि लड़कों को ले जाएं। जब केतन के परिवार वाले गांव पहुंचे, तब तक उसकी हालत गंभीर थी। पीड़ित युवक ने मौत से पहले अपने पिता को बताया कि उसे जानबूझकर पहले से बनाई गई साजिश के तहत बुलाया गया था। उसे चौंद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दीवाकर को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

केतन के पिता धनपाल लाल ने बताया, "सोमवार सुबह मेरे बेटे के फोन से कॉल आई। कॉल करने वाले यशवीर ने पूछा कि केतन कहां है। जब मैंने घर पर चेक किया तो केतन वहां नहीं था। यशवीर को जब यह बात बताई तो उसने कहा कि हमने उसको मार दिया है, बाद में जब मैंने वापस कॉल की तो कोई जवाब नहीं दिया।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंजाम दी गई। केतन को बेहद दर्दनाक तरीके से यातना दी गईं जिसके कारण उसकी मौत हो गई।

लड़की के पिता ने केतन के पिता धनपाल को फ़ोन करके अपने बेटे को वापस ले जाने के लिए कहा। धनपाल ने केतन को खून से लथपथ पाया और उसे तुरंत पास के हेल्थ सेंटर ले गए, जहाँ चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।

दिवाकर के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई जिसका इलाज चल रहा है। मंगलवार को टिहरी गढ़वाल ज़िला अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने केतन का पोस्टमॉर्टम किया। पुलिस ने कहा कि वे चोटों की सही प्रकृति और गंभीरता का पता लगाने के लिए रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।

केतन के गाँव के पूर्व प्रधान दिनेश शाह ने कहा कि आरोपियों को कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं था। "अगर लड़कों की गलती थी, तो लड़की के परिवार को उनके परिवारों या पुलिस को बताना चाहिए था। उन्हें एक लड़के को पीट-पीटकर मार डालने का अधिकार किसने दिया?" उन्होंने घटना में शामिल सभी लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की माँग की।

टिहरी गढ़वाल की SSP श्वेता चौबे ने बताया कि लड़की का परिवार केतन के साथ उसकी दोस्ती से नाखुश था। चौबे ने कहा, "लड़की के पिता पहले लड़के के पिता से मिले थे और उनसे कहा था कि वे अपने बेटे को उनकी बेटी से बात न करने दें। रविवार रात, उन्होंने और उनके साथियों ने इस अपराध को अंजाम दिया। सोमवार को घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। हमने लड़की के पिता यशबीर और दादा विद्यादत्त पंवार को गिरफ़्तार कर लिया है। जहाँ तक चोटों की गंभीरता का सवाल है, हम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।" युवक के परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए उसका शव ले जाने से इनकार कर दिया और कहा कि सभी हमलावरों को गिरफ्तार किये जाने तक वे इसे नहीं ले जाएंगे। घटना के बाद केतन के गाँव में समुदाय वासी आक्रोशित हैं और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन घनसाली की उप-जिलाधिकारी मंजू राजपूत को सौंपा, जिसमें निष्पक्ष जांच, न्याय और पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग की गई।

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