
श्रीगंगानगर- जिले में 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य सामूहिक दुष्कर्म का मामला पूरे राजस्थान में आक्रोश की लहर पैदा कर रहा है। घटना करीब 18 जून को शुरू हुई जब लड़की अपने घर से गायब हो गई।
पुलिस जांच के अनुसार, एक ई-रिक्शा चालक ने उसे अगवा कर कुछ पैसे लेकर होटल मालिक को बेच दिया। इसके बाद बच्ची को शहर के विभिन्न होटलों जैसे जॉय इन, खुंगर और सफायर आदि में पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, जहां 32 नामजद आरोपियों ने उसके साथ बार-बार सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता के बयान में कहा गया है कि कभी तीन-चार तो कभी इससे ज्यादा लोग मिलकर उसके साथ अपराध करते थे और दर्द से चीखने पर उसे शराब पिला दी जाती थी।
इस मामले के जांच अधिकारी और अडिशनल एसपी कैलाश दान बताते हैं कि इस लड़की का इंस्टाग्राम पर एक फ्रेंड था, जिससे मिलने के लिए वह 18 जून को श्रीगंगानगर से सौ किलोमीटर दूर विजयनगर गई थी, वहां उस फ्रेंड ने उसके साथ रेप किया।
जानकारी के मुताबिक़ उसके बाद ये बच्ची विजयनगर से बस से रात में श्रीगंगानगर पहुंची और रिक्शा किया। बच्ची के घर ना पहुंचने पर उसकी मां ने कई जगह उसकी तलाश की और रिश्तेदारी में पूछताछ की. लेकिन जब 22 जून तक भी बच्ची घर नहीं पहुंची तो माँ पुलिस थाने पहुंची।
पुलिस ने CCTV फुटेज और DVR रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच तेज की है। अब तक 14 से 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें होटल मालिक, मैनेजर, स्टाफ और रिक्शा चालक शामिल हैं। बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है। जन आक्रोश को देखते हुए 1 जुलाई की देर रात प्रशासन ने इन होटलों पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए। मामले में POCSO एक्ट, बलात्कार, अपहरण और मानव तस्करी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने पर सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
बच्ची को शहर के विभिन्न होटलों में पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, जहां 32 नामजद आरोपियों ने उसके साथ बार-बार सामूहिक दुष्कर्म किया।
भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ बंधक बनाकर 32 लोगों द्वारा किए गए सामूहिक दुष्कर्म की घटना अत्यंत भयावह और मानवता को शर्मसार करने वाली है। पीड़िता के अनुसार, उसके साथ कभी तीन से चार और कभी इससे अधिक लोगों ने मिलकर दुष्कर्म किया। बार-बार होने वाले हमलों से जब भी उसे दर्द होता था, तो उसे शराब पीने के लिए मजबूर किया जाता था। यह अपराध क्रूरता की सभी सीमाओं को पार करने वाला है। इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह है कि घटना के खुलासे के 15 दिन बाद भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यह सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”
चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान सरकार से मांग की कि 24 घंटे के अंदर बाकी सभी फरार दरिंदों को गिरफ्तार किया जाए, मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो, दोष सिद्ध होने पर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाए और पीड़ित दलित परिवार को तत्काल सुरक्षा, न्याय तथा उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने वकीलों से भी अपील की कि ऐसे दरिंदों की पैरवी न करें।
यह मामला बाल तस्करी, होटल नेटवर्क में शोषण और नाबालिग सुरक्षा की चुनौतियों को उजागर करता है। पीड़िता की मेडिकल व काउंसलिंग जारी है। सोशल मीडिया पर कई वायरल वीडियो गलत तरीके से इस मामले से जोड़े जा रहे हैं, जो वास्तव में उत्तर प्रदेश के हरदोई के अलग मामले के हैं। स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं और न्याय की मांग तेज हो गई है। पुलिस और प्रशासन का दावा है कि वे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और आगे की कार्रवाई जारी है।
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