
लखनऊ- लखनऊ विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर महिला छात्रावास में 26 मार्च को हुई एक घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है। एलएलबी तृतीय वर्ष की छात्रा नेहा कामले ने छात्रावास के व्हाट्सएप ग्रुप में डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) के रूप में लगाई थी। इसके बाद कुछ अन्य छात्राओं ने कथित तौर पर उनके कमरे में घुसकर उनसे मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता नेहा कामले ने बताया कि वह उक्त व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थीं। घटना के बाद उन्होंने प्रोवोस्ट, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर और विश्वविद्यालय प्रॉक्टर को शिकायत पत्र भेजा। प्रोवोस्ट और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर उनसे मिले, लेकिन शुरुआत में कोई सहायता नहीं मिली।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संज्ञान लिया। प्रॉक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने 2 अप्रैल को मामले की जांच शुरू कर दी और पीड़िता तथा आरोपी छात्राओं के बयान दर्ज किए।
बिरसा अंबेडकर फूले छात्र संगठन-बीएपीएसए ने कार्रवाई की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के वीसी कार्यालय का घेराव किया और प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ा है।
जांच समिति बयान दर्ज करने का कार्य कर चुकी है, लेकिन अभी तक आरोपी छात्राओं पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं हुई है। पीड़िता ने कुलपति को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया है।
यह मामला जातीय संवेदनशीलता को लेकर चर्चा में है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रॉक्टर से आगे की कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि छात्रावास में सभी छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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