
जयपुर- राजस्थान पुलिस के मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अपने सीनियर पर जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया है, जिसने विभाग के भीतर जातिवाद के मुद्दे को गरमा दिया है। पुलिस दूरसंचार के निदेशक दौलतराम अटल ने पुलिस अधीक्षक (दूरसंचार) नीतू बुगालिया के खिलाफ ज्योति नगर थाने में FIR दर्ज कराई है। घटना 5 मार्च की शाम करीब 4:30 बजे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं) वी.के. सिंह के कक्ष संख्या 206 में हुई, जहां बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
जानकारी के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य अजमेर और उदयपुर रेंज सहित कुल सात जिलों में पुलिस संचार व्यवस्था के उन्नयन, तकनीकी सुधार और अपग्रेडेशन पर विचार-विमर्श करना था। बैठक में डॉ. हेमराज मीना (पुलिस अधीक्षक), राकेश कुमार डाका (पुलिस अधीक्षक), मदनलाल (पुलिस अधीक्षक), नीतू बुगालिया (पुलिस अधीक्षक, दूरसंचार), उपाधीक्षक प्रवीण सेन, अवनीश तथा उपनिरीक्षक रविंद्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
एडीजी वी.के. सिंह की अनुमति से निदेशक दौलतराम अटल ने एजेंडा पर अपना विस्तृत प्रेजेंटेशन दे रहे थे। इसी दौरान आरोपी नीतू बुगालिया ने बार-बार उन्हें टोका और कथित रूप से कहा, "रिजर्वेशन का डायरेक्टर है... आप तो आरक्षण से बने हुए हो, जाति के आधार पर प्रमोट होने के कारण डायरेक्टर बने हैं।" शिकायतकर्ता अटल का आरोप है कि बुगालिया उनकी जाति से पहले से परिचित होने के बावजूद सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित करती रहीं और प्रस्तुति में लगातार व्यवधान डालती रहीं, जिससे उनका पूरा प्रेजेंटेशन नहीं हो सका।
दौलतराम अटल ने अपनी शिकायत में बताया कि इस घटना से न केवल उनका व्यक्तिगत अपमान हुआ, बल्कि वरिष्ठों और अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के सामने उनकी गरिमा को गहरी ठेस पहुंची।
जब अटल ने विरोध जताया और कहा कि वे ऐसी टिप्पणियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे, तो बुगालिया ने एडीजी के सामने ही चुनौती देते हुए कहा, "जाइए करवा दो, मैंने ऐसी बहुत एफआईआर देख रखी हैं।" स्थिति बिगड़ने पर एडीजी सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने संसदीय भाषा में अटल का समर्थन करते हुए कहा, "इनके कहने से कुछ नहीं होता, सरकार ने आपको निदेशक पुलिस दूरसंचार बनाया है और मैं आपको निदेशक मानता हूं।" इसके बाद उन्होंने नीतू बुगालिया को बैठक से बाहर जाने और अपने निर्धारित ड्यूटी स्थान पर वापस लौटने का सख्त निर्देश दिया।
दौलतराम अटल ने अपनी शिकायत में बताया कि इस घटना से न केवल उनका व्यक्तिगत अपमान हुआ, बल्कि वरिष्ठों और अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के सामने उनकी गरिमा को गहरी ठेस पहुंची। साथ ही, महत्वपूर्ण सरकारी कार्य और प्रस्तुति पूरी तरह बाधित हो गई। उन्होंने आरोपी के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता रेगर समाज से ताल्लुक रखते हैं।
शिकायत पर ज्योति नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने की मंशा) तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं जातिगत आधार पर अपमान, गरिमा हनन और सार्वजनिक स्थान पर ऐसी टिप्पणियों पर सख्त दंड का प्रावधान करती हैं। जांच का जिम्मा जयपुर पुलिस आयुक्तालय की एडीसीपी (प्रोटोकॉल) देवी सहाय मीना को सौंपा गया है। यह घटना राजस्थान पुलिस में कार्यस्थल पर जातिगत पूर्वाग्रह, पदोन्नति और आरक्षण को लेकर उठने वाले विवादों को उजागर करती है। विभागीय स्तर पर जांच जारी है, यदि आरोप सिद्ध हुए तो आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई संभव है, जिससे पुलिस बल की छवि पर असर पड़ सकता है।
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