
मुरैना- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के ग्राम जतावर के रहने वाले 40 वर्षीय भरतलाल जाटव पर जातिगत दुश्मनी में हमला कर अपहरण करने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ने थाना सिविल लाइन में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई है जिसमें आरोपियों पर मारपीट, गाली-गलौज, जातिसूचक अपमान, अपहरण और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित भरतलाल जाटव पुत्र भीखाराम जाटव ने रिपोर्ट में बताया कि दीपावली के समय जनकपुर निवासी भूरा गुर्जर और शेरू गुर्जर से उनका विवाद हो गया था। उसी रंजिश के चलते 2 मई को दोपहर करीब 3:45 बजे जब वह बस स्टैंड से अपने गांव जतावर ई-रिक्शा से लौट रहे थे, तब चम्बलदीप होटल के पास स्वराज ट्रैक्टर मय ट्रॉली ने उनके रिक्शे को रोक दिया। ट्रैक्टर चालक ने आगे जाने नहीं दिया और ट्रॉली से भूरा गुर्जर, शेरू गुर्जर तथा सुरेंद्र गुर्जर उतरकर उनके साथ मारपीट करने लगे।
पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने उन्हें गालियां दीं और चमार जाति का अपमानजनक शब्द बोलकर कहा कि “तुम बहुत दादागिरी करते हो”। जब भरतलाल ने गालियां रोकने को कहा तो तीनों ने थप्पड़-घूंसे मारकर उन्हें बुरी तरह पीटा और ट्रैक्टर में पटक दिया। भूरा गुर्जर ने ट्रैक्टर चालक को जनकपुर ले जाने को कहा। मौके पर पीड़ित की भतीजी अंजली और भतीजा आकाश भी मौजूद थे।
जनकपुर पहुंचने पर करुआ गुर्जर पुत्र सुरेंद्र गुर्जर, महेंद्र गुर्जर और दिलीप गुर्जर भी शामिल हो गए। इन लोगों ने भी मां-बहन की गालियां दीं, जातिसूचक अपमान किया और जूतों से मारपीट की। इसके बाद आरोपियों ने जूतों की माला बनाकर पीड़ित के गले में डाल दी और पूरे गांव में घुमाया। इस दौरान गांव में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे।
पीड़ित ने बताया कि जब पुलिस की गाड़ी आती दिखी तो बल्लो गुर्जर ने कट्टा निकालकर उनकी छाती पर रख दिया और धमकी दी कि यदि थाने में रिपोर्ट की तो जान से मार देंगे। मारपीट में उनके चेहरे पर दाहिनी भौंह के पास चोट आई और खून निकला तथा शरीर पर जगह-जगह चोटें आई हैं।
इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए भीम आर्मी नेता सुनील आस्तेय ने कहा, “दलित है इसलिए किडनैप कर जूतों से पिटा, और माला पहनाई। देश चांद पर पहुंच गया, लेकिन दलित को आज भी गांव की सड़क पर इंसान की तरह चलने का अधिकार नहीं मिला। मुरैना के ग्राम जतावर में जाटव समाज के व्यक्ति को ट्रॉली में डालकर पीटना, जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाना, यह घटना नहीं, संविधान के मुंह पर मारा गया तमाचा है। शर्म आनी चाहिए उस व्यवस्था पर, जो हर चुनाव में ‘समानता’ का ढोल पीटती है और जमीन पर दलितों को आज भी जानवरों से बदतर समझा जाता है। लगता है कुछ जातिवादी मानसिकताओं को अभी भी कानून का नहीं, सिर्फ अपनी ऊंची जाति का नशा चढ़ा है। ये तो अच्छा हुआ FIR दर्ज हो गई, वरना अक्सर दलितों का अपमान इस देश में ‘समझौते’ के नीचे दबा दिया जाता है। अब सिर्फ FIR नहीं, आरोपियों की ऐसी गिरफ्तारी होनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ियां याद रखें, संविधान से बड़ा कोई नहीं होता।”
पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान भूरा गुर्जर, शेरू गुर्जर, सुरेंद्र गुर्जर, करुआ गुर्जर, महेंद्र गुर्जर, दिलीप गुर्जर और बल्लो गुर्जर सहित अन्य के रूप में की गई है। पूरे मामले में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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