
भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में बढ़ते पेयजल संकट के बीच प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू कर दिया है। कलेक्टर बालागुरु के. के निर्देश पर लागू यह अधिनियम 31 जुलाई तक प्रभावी रहेगा। गर्मी के मौसम में पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन का यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में उपलब्ध सीमित जल संसाधनों का संरक्षण करना और अनावश्यक उपयोग को रोकना है, ताकि आम नागरिकों को पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
गर्मी के बढ़ते तापमान के साथ ही जिले के कई हिस्सों में जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में प्रशासन ने समय रहते तैयारी करते हुए न केवल नियंत्रणात्मक कदम उठाए हैं, बल्कि तकनीकी और व्यवस्थागत सुधारों के जरिए जल आपूर्ति को भी मजबूत करने की दिशा में काम किया है। पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद अब पानी के दुरुपयोग पर सख्ती से रोक लगेगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
258 गांवों में संकट की आशंका, पहले से बनाई गई रणनीति
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने ग्रीष्मकाल की चुनौतियों को देखते हुए पहले ही व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली थी। इस योजना के तहत जिले के 258 ऐसे गांवों और बसाहटों को चिन्हित किया गया है, जहां हर साल गर्मी के दौरान पेयजल संकट की स्थिति बनती है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और प्राथमिकता के आधार पर जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि समय रहते इन क्षेत्रों को चिन्हित करने से संकट की गंभीरता को कम किया जा सकता है। यही वजह है कि इन गांवों में अतिरिक्त संसाधनों और तकनीकी उपायों को लागू किया गया है, जिससे लोगों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े।
हैंडपंपों की क्षमता बढ़ाकर दी राहत
जल संकट से निपटने के लिए चिन्हित गांवों में हैंडपंपों की क्षमता बढ़ाने का काम किया गया है। 58 ग्रामों में पहले से स्थापित 102 हैंडपंपों में कुल 612 मीटर राइजर पाइप बढ़ाए गए हैं, जिससे गहराई में मौजूद पानी तक पहुंच आसान हो सके। इसके अलावा 30 बसाहटों में नए हैंडपंप लगाए गए हैं, ताकि अतिरिक्त जल स्रोत तैयार हो सकें।
सिर्फ इतना ही नहीं, 75 बसाहटों में सिंगल फेस मोटर पंप भी स्थापित किए गए हैं। इन पंपों के जरिए पानी की आपूर्ति अधिक नियमित और सुचारु तरीके से हो सकेगी। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता में सुधार आने की उम्मीद है।
हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ाई गई नलकूपों की क्षमता
सीहोर जिले में 95 बसाहटों में हाइड्रो फ्रैक्चरिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। इस प्रक्रिया के जरिए नलकूपों की जल आवक क्षमता को बढ़ाया गया है, जिससे अधिक मात्रा में पानी निकाला जा सके। इसके साथ ही जिन नलकूपों में पानी उपलब्ध था, उनकी साफ-सफाई कराकर उन्हें फिर से उपयोग में लाया गया है।
यह तकनीकी पहल जल संकट से निपटने में कारगर साबित हो रही है, क्योंकि इससे पुराने और कम उपयोगी जल स्रोतों को भी पुनर्जीवित किया जा सका है। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिली है और लोगों को राहत मिलने की संभावना बढ़ी है।
हजारों स्रोतों से हो रही जल आपूर्ति
वर्तमान में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 8830 हैंडपंपों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा 299 एकल नलजल प्रदाय योजनाएं और 200 ग्रामों में समूह नलजल योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं के जरिए हजारों परिवारों तक नियमित रूप से पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन इन सभी स्रोतों की लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या जल आपूर्ति में बाधा आने पर तुरंत समाधान किया जा सके।
नियंत्रण कक्षों से हो रही निगरानी
पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला और उपखंड स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इन कक्षों के माध्यम से पूरे जिले की जल आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। किसी भी गांव से पानी की समस्या की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
कलेक्टर बालागुरु के. ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पानी की बर्बादी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद अब पानी का अनावश्यक उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की यह पहल न केवल वर्तमान संकट से निपटने का प्रयास है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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