
भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगांय बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का जल-सत्याग्रह 15वें दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश और रेड अलर्ट के बीच बांध क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में हालात बिगड़ गए हैं। मड़लिया, टपरियां, कुंवरपुर, बहनरी, जुड़र, सर्रा और करिया खेत सहित आसपास के कई गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है।
जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। घरों में पानी घुसने से अनाज, राशन और गृहस्थी का सामान खराब होने की बात ग्रामीणों ने कही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं मिली है। ऐसे में बिना मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास के जलस्तर बढ़ाए जाने का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।
15वें दिन भी पानी में जारी रहा सत्याग्रह
मझगांय बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन जय किसान संगठन के अमित भटनागर के नेतृत्व में जारी है। ग्रामीणों ने जलमग्न क्षेत्र में रहकर विरोध दर्ज कराया। भारी बारिश और रेड अलर्ट के बावजूद आंदोलनकारी स्थल पर डटे हुए हैं।
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों की ओर से अलग-अलग तरीके से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास और नुकसान के उचित आकलन की भी है।
ग्रामीण बोले- मकान गिरा दिया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला
विस्थापित ग्रामीण धनीराम ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से उनका मकान गिरा दिया गया, लेकिन उन्हें अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। उनका कहना है कि मकान गिरने के बाद परिवार के सामने रहने और सामान सुरक्षित रखने की समस्या खड़ी हो गई है।
वहीं रानी रैकवार ने बताया कि उनका घर और कुआं भी गिराया गया, लेकिन उन्हें अभी तक कोई राशि नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की संपत्ति परियोजना के कारण प्रभावित हुई है, उन्हें पहले मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था मिलनी चाहिए।
5 लाख रुपये देने का किया गया था दावा
ग्रामीणों के अनुसार, सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन कई परिवारों को अब तक यह राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुआवजे की राशि उनके बैंक खातों में नहीं पहुंचती, तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों की सूची और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट की जाए और पात्र परिवारों को जल्द भुगतान किया जाए।
बारिश और दूषित पानी से बिगड़ रही तबीयत
पिछले 15 दिनों से बारिश और पानी के बीच जारी सत्याग्रह के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। उनके अनुसार लगातार पानी के संपर्क में रहने से पैरों में घाव, चकत्ते और त्वचा संबंधी समस्याएं हो रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन स्थल पर लंबे समय तक पानी और बारिश के बीच रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए।
नुकसान का आकलन और सुरक्षित पुनर्वास की मांग
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से गांवों और घरों में हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। इसके साथ ही खराब हुए अनाज और गृहस्थी के सामान के नुकसान का आकलन, राहत सामग्री उपलब्ध कराने, लंबित मुआवजे का भुगतान और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध परियोजना के कारण जिन परिवारों की जमीन, मकान, कुएं और आजीविका प्रभावित हुई है, उनके पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए बिना उन्हें डूब क्षेत्र में छोड़ना गंभीर समस्या पैदा कर रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक जल-सत्याग्रह जारी रहेगा।
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