‘वर्दी वाले अपराधी हैं’- पुलिस, सुप्रीम कोर्ट पर महमूद प्राचा का बड़ा बयान, ईमानदार पुलिस से कहा- सबूत जुटाओ, हम जेल भेजेंगे!

प्राचा ने जोर देकर कहा कि वर्दी में नामपट्टा न रखने वाले और लाठियां चलाने वाले, करंट छोड़ने वाले सब पुलिस अधिकारी नहीं हैं। वे अपराधी हैं। उन्हें अपराधी कहना शुरू करो।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट को लेकर प्राचा ने स्पष्ट किया कि वकील ढाल बनकर खड़े होंगे।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट को लेकर प्राचा ने स्पष्ट किया कि वकील ढाल बनकर खड़े होंगे। HNP News
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नई दिल्ली- मानवाधिकार वकील महमूद प्राचा ने जंतर मंतर से दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जितने भी भ्रष्ट पुलिस अधिकारी हैं, उनकी एक-एक की वीडियो बन रही है। भारत का संविधान उन्हें नहीं छोड़ेगा। चुन-चुनकर उन लोगों को जेल भिजवाने का काम संविधान और कानून करेगा।

मीडिया से बात करते हुए प्राचा ने कहा, “मैं बता रहा हूं ध्यान से सुन लें सारे पुलिस के अधिकारी जो भ्रष्ट हैं और ईमानदार अधिकारियों के लिए भी मेरे पास रिक्वेस्ट है। जितने भ्रष्ट पुलिस के अधिकारी हैं एक-एक की वीडियो बन रही है। छोड़ेंगे नहीं। भारत का संविधान उन्हें छोड़ेगा नहीं। यह बात ध्यान रख लें। चुन चुन के जिन लोगों ने ये ज्यादतियां की हैं। चुन चुन के जेलों में भिजवाने का काम करेगा भारत का संविधान और भारत का कानून।”

उन्होंने बताया कि वे वकील की अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। देर से पहुंचने के लिए उन्होंने माफी मांगी लेकिन अब उनकी पूरी टीम मौजूद है। प्राचा ने स्पष्ट किया कि वकील ढाल बनकर खड़े होंगे। प्रदर्शनकारियों को कोई कानूनी कार्रवाई करनी हो तो हम करेंगे लेकिन कोई डंडा नहीं उठाएगा।

ईमानदार पुलिस अधिकारियों से उन्होंने गुजारिश की कि उनकी जिम्मेदारी है ऐसे भ्रष्ट लोगों को मालिकों (जनता) के ऊपर हमला करने से रोकें। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारी जीडी एंट्रीज करें और अगर बचना है तो भारत के संविधान और कानून से तो अपनी पर्सनल डायरी में लिखें कि आज इस अधिकारी ने यह कार्य किया।। उन्होंने सलाह दी कि ईमानदार अधिकारी चोरी-छुपे ही सही, सबूत इकट्ठा करें। काम वकीलों का है।

प्राचा ने कहा कि उन सबको जो यहां बच्चों के खून निकाल रहे हैं, हड्डियां तोड़ रहे हैं, हमले कर रहे हैं और झूठे मुकदमे बना रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस देश में झूठे मुकदमों से बच्चों को निकालने का सबसे ज्यादा अनुभव है।

प्राचा ने पुलिस अधिकारियों को याद दिलाया कि अगर कोई सीनियर ऑफिसर अपराध करने के लिए निर्देश देता है तो उस अपराधिक आदेश का पालन न करना हर पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी है। लाठी मारने, गोली चलाने, आंसू गैस चलाने और बैरिकेड लगाने के आदेश अपराध हैं। वे इन आदेशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी आप लोग देखेंगे कि पुलिस अधिकारी मना करेंगे कि हम अपने मालिकों (जनता) के सर नहीं फाड़ेंगे, करंट नहीं लगाएंगे, आंसू गैस नहीं छोड़ेंगे क्योंकि ये ईमानदारी से, शराफत से पीसफुली बैठे हैं।

वर्दी और नामपट्टा न रखने वालों को अपराधी करार

सुप्रीम कोर्ट के हालिया बयान के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर प्राचा ने कहा कि जिस अधिकारी ने पुलिस की वर्दी उतार दी, वह आम नागरिक हो गया और आम नागरिक मतलब अपराधी। उन्होंने कहा कि पहले तो हम लोगों को पुलिस अधिकारी कहना बंद करना पड़ेगा। वे कॉमन क्रिमिनल्स थे जो अमित शाह साहब का गैंग है। क्रिमिनल गैंग के मेंबर्स थे।

उन्होंने आगे कहा, “जिस अधिकारी ने ये हटा दिया उसे पुलिस अधिकारी कहना नहीं चाहिए। वो क्रिमिनल्स थे। अमित शाह साहब के स्पेशल स्टाफ था वो स्पेशल स्टाफ के वर्दी पहन के ही पब्लिक डीलिंग करनी होती है। एक कानून अमित शाह साहब को नहीं पता। मोदी जी को नहीं पता, उनके लॉ मिनिस्टर साहब को नहीं पता, हमें तो पता है।”

प्राचा ने जोर देकर कहा कि वर्दी में नामपट्टा न रखने वाले और लाठियां चलाने वाले, करंट छोड़ने वाले सब पुलिस अधिकारी नहीं हैं। वे अपराधी हैं। उन्हें अपराधी कहना शुरू करो। पुलिस अधिकारी मत कहो।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट जाने से मना किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना है। क्यों जाते हैं? सिर्फ और सिर्फ ये सब करवाने के लिए मोदी जी-अमित शाह जी चाहते हैं कि लोगों का जो नफरत है वो किसी और इंस्टिट्यूशन की तरफ डाइवर्ट हो जाए। कोर्ट की तरफ डाइवर्ट हो जाए।

प्राचा ने जस्टिस लोया का जिक्र करते हुए कहा कि क्या आपको लगता है कि जज लोया के साथ जो हुआ उसकी नियति बाकी सब जज इतनी आसानी से झेलने को तैयार हो जाएंगे? उन्होंने कहा कि अब जनता खड़ी है। सारे इंस्टिट्यूशन धीरे-धीरे ठीक होंगे।

अमित शाह के इस्तीफे और ईवीएम मांग पर क्या बोले

प्राचा ने कहा कि अमित शाह का इस्तीफा वन पॉइंट प्रोग्राम होना चाहिए। अगर सफलता प्राप्त करनी है तो अमित शाह जी के इस्तीफे को छोड़कर हर मांग मानी जाएगी। एक डिमांड सबसे ऊपर लिख लो - ईवीएम हटाओ, देश बचाओ, पेपर बैलेट से इलेक्शन कराओ।

उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि असली जड़ वो है। हमें इसमें घसीटें ना। मैं अदालत में ऑफिसर ऑफ द कोर्ट हूं। ना घसीटें अदालतों को। वो घसीटते हैं जो आरएसएस के द्वारा बहकाए हुए हैं। यह जनता की अदालत है। सबसे बड़ी अदालत है। बाबा साहब ने सबसे बड़ी अदालत इसे बनाया है।

प्राचा ने स्पष्ट किया कि भारत की जनता सुप्रीम है। भारत का संविधान सुप्रीम है। सुप्रीम कोर्ट के जजेस जनता के नौकर हैं।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं के आने पर उन्होंने खुशी जताई लेकिन निवेदन किया कि एक दिन में न रुक जाएं। रोज आएं। ईवीएम की डिमांड फिर सुन लें। उन्होंने कहा कि ईवीएम का नाम आते ही मोदी जी भागते हैं क्योंकि उसी से वे पीएम हैं। अमित शाह ईवीएम के एचएम हैं, जनता के एचएम नहीं।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोल को हटाने और नए कमिश्नर अनुराग कुमार के आने पर प्राचा ने कहा कि नाकाम सीपी थे सतीश गोल। नए सीपी कामयाब हो गए क्योंकि उन्होंने अपने मालिकों के ऊपर लाठी, करंट और आंसू गैस चला लिए। झूठे मुकदमे करा लिए। यह अपराध है। अमित शाह का गैंग अपराधिक है।

प्राचा ने आगे कहा कि 10,000 एफआईआर कर लें। हम लोग हैं अभी जिंदा। हमने देखा है, आगे भी देखेंगे। उन्होंने साफ किया कि मिशन के काम में किसी से फीस नहीं ली है और न लेंगे।

उन्होंने जोर दिया कि संविधान चोरों और बेईमानों को धमकाता है। वे बाबा साहब के सिपाही हैं। मालिकों को याद दिलाया जा रहा है कि वे मालिक हैं और नौकर नौकर हैं।

प्राचा ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। वकील ढाल बनकर खड़े होंगे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच में खड़े होना वकीलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने दोहराया कि सब कुछ अपने आप होगा। थोड़े दिन रुक जाइए। चुनाव आयोग भी ईवीएम से चुनाव बंद कराएगा। आंदोलन पेपर बैलेट की मांग पर जारी रहेगा।

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