
नई दिल्ली- दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी युवा आंदोलन के बीच एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हैं, वहीं दूसरी ओर देश के अलग-अलग राज्यों से लोग डिजिटल माध्यमों के जरिए उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। इस समर्थन का सबसे भावुक रूप ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे ज़ोमैटो, फ्लिपकार्ट और स्विगी आदि के माध्यम से प्रदर्शन स्थल पर भेजे जा रहे भोजन के पैकेट हैं।
पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें देर रात और बारिश के बीच फूड डिलीवरी एजेंट प्रदर्शन स्थल पर भोजन पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। इन ऑर्डरों की खास बात यह है कि इन्हें दिल्ली में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नहीं, बल्कि मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, जयपुर, हैदराबाद और देश के अन्य शहरों में बैठे आम नागरिकों ने अपने मोबाइल फोन से बुक किया। डिलीवरी नोट में कई लोगों ने लिखा कि "जो भी भूखा हो, उसे यह खाना दे दीजिए।"
सोशल मीडिया पर सबसे पहले एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक डिलीवरी एजेंट रात के समय जंतर-मंतर पहुंचकर दर्जनों फूड पैकेट प्रदर्शनकारियों को सौंपता दिखाई देता है। बताया गया कि यह ऑर्डर मुंबई से अनुज रावत नामक एक व्यक्ति ने कराया था, जिसने अनुरोध किया था कि भोजन किसी भी भूखे प्रदर्शनकारी में बांट दिया जाए। इसके बाद इसी तरह के कई और ऑर्डर आने लगे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अनजान लोग लगातार ऑनलाइन भोजन भेजते रहे और यह सिलसिला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन स्थल का पता साझा करते हुए दूसरों से भी भोजन भेजने की अपील की। कई पोस्टों में लिखा गया कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते, वे कम से कम प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन भेजकर अपना समर्थन जता सकते हैं। कई वीडियो में फूड पैकेटों पर "Stay Strong", "With the Students" और "Solidarity" जैसे संदेश भी दिखाई दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बताती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब केवल भोजन मंगाने का साधन नहीं रहे, बल्कि नागरिक एकजुटता का माध्यम भी बनते जा रहे हैं। पहले आंदोलनों में सहायता स्थानीय स्वयंसेवकों, गुरुद्वारों के लंगर या सामाजिक संगठनों के माध्यम से पहुंचती थी। अब मोबाइल ऐप और डिजिटल भुगतान ने सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को भी सीधे सहयोग करने का अवसर दे दिया है।
भारत में इससे पहले किसान आंदोलन के दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा लंगर और सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया गया था। हालांकि इस बार बड़ी संख्या में व्यक्तिगत नागरिकों द्वारा फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए सीधे प्रदर्शन स्थल पर भोजन भेजना एक नया और उल्लेखनीय रुझान माना जा रहा है।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर इन भोजन पैकेटों की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उन्हें यह एहसास हुआ कि उनकी आवाज़ केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। कई लोगों ने लिखा कि वे भेजने वालों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, लेकिन उनका यह सहयोग आंदोलन में डटे रहने का हौसला बढ़ाता है।
हाल के दिनों में इस युवा आंदोलन को लेकर विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी समर्थन व्यक्त किया है। इसी व्यापक समर्थन के बीच ऑनलाइन भोजन भेजने की पहल ने आंदोलन के मानवीय पक्ष को सामने लाया है। राजनीतिक बयानबाजी से अलग, यह पहल नागरिकों द्वारा नागरिकों के लिए दिखाई गई सहानुभूति और एकजुटता का उदाहरण बनकर उभरी है।
जंतर-मंतर का यह दृश्य बताता है कि तकनीक केवल संवाद या विरोध दर्ज कराने का माध्यम नहीं रही। एक मोबाइल ऐप, कुछ क्लिक और एक भोजन का पैकेट- इन तीनों ने मिलकर सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को प्रदर्शन स्थल से जोड़ दिया। ऐसे समय में जब देशभर के लोग हर आंदोलन में शारीरिक रूप से शामिल नहीं हो सकते, डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिक भागीदारी और मानवीय सहयोग का नया पुल बनते दिखाई दे रहे हैं।
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