मलेशिया के GIJC25 सम्मेलन में ‘द मूकनायक’ के उप संपादक अंकित पचौरी बतौर फेलो शामिल

मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी समुदायों की समस्याओं पर लगातार प्रकाश डालने के कारण अंकित पचौरी को एक विश्वसनीय और जनपक्षधर पत्रकार के रूप में जाना जाता है।
मलेशिया के GIJC25 सम्मेलन में ‘द मूकनायक’ के उप संपादक अंकित पचौरी बतौर फेलो शामिल
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नई दिल्ली। मलेशिया के कुआलालंपुर में हुए ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म कॉन्फ्रेंस (GIJC25) में भारत के स्वतंत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘द मूकनायक’ की खोजी पत्रकारिता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली। सम्मेलन में द मूकनायक के उप संपादक पत्रकार अंकित पचौरी बतौर GIJC फेलो शामिल हुए। दुनिया के 135 देशों से आए 1500 से अधिक पत्रकारों के बीच यह उपस्थिति न सिर्फ भारत, बल्कि जनसरोकार आधारित और खोजी पत्रकारिता के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण रही।

Ankit Pachauri
पत्रकार अंकित पचौरी मलेशिया GIJN के पत्रकार सम्मेलन में शामिल

अंकित पचौरी कौन हैं?

अंकित पचौरी मध्य प्रदेश के रहने वाले पत्रकार हैं, जिनका पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे भास्कर, नई दुनिया, पत्रिका, डी.डी. न्यूज़ (दूरदर्शन) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे ‘द मूकनायक’ के उप संपादक (Deputy Editor) हैं, जहाँ वे सामाजिक न्याय, हाशिए पर पड़े समुदायों, जलवायु संकट, आदिवासी मुद्दों और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर काम करते हैं।

उनकी लिखी हुई चर्चित पुस्तक 'Adivasi Reporting' पत्रकारिता के विद्यार्थियों और युवा रिपोर्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण मानी जाती है। अंकित पचौरी GIJN द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और सहयोगी रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट्स में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। GIJC25 में फेलो के रूप में चयन उनके पेशेवर कौशल और जनहितकारी पत्रकारिता के प्रति समर्पण की स्वीकृति है।

अंकित पचौरी लंबे समय से मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों पर विशेष पत्रकारिता करते रहे हैं। उनकी इस गहरी समझ और जमीनी अनुभव को उनकी किताब ‘आदिवासी रिपोर्टिंग’ ने और विस्तार दिया है, जिसकी खूब चर्चा होती है। यह किताब न सिर्फ युवा पत्रकारों के लिए एक मार्गदर्शक मानी जाती है, बल्कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। आदिवासी जीवन, उनके अधिकार, संघर्ष और नीतिगत खामियों पर अंकित का काम हमेशा अलग पहचान रखता है।

अंकित की कई महत्वपूर्ण स्टोरीज़ का उल्लेख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ है। उनकी रिपोर्टों को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रकाशन ‘निमन रिपोर्ट्स’ में जगह मिल चुकी है, जहाँ उनकी पत्रकारिता की सराहना की गई थी। इनमें एक दलित महिला की लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मी बेटी के शिक्षा के अधिकार पर लिखी गई विशेष स्टोरी और आदिवासियों के स्वास्थ्य व बुनियादी अधिकारों पर आधारित रिपोर्टें प्रमुख रहीं। इन विषयों पर गहराई से और संवेदनशीलता के साथ की गई रिपोर्टिंग ने उन्हें मध्य प्रदेश के प्रमुख सामाजिक न्याय रिपोर्टरों की सूची में स्थापित किया है।

मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी समुदायों की समस्याओं पर लगातार प्रकाश डालने के कारण अंकित पचौरी को एक विश्वसनीय और जनपक्षधर पत्रकार के रूप में जाना जाता है। उनकी रिपोर्टिंग सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और हाशिए पर खड़े समुदायों के अधिकारों को केंद्र में रखती है। शासन-प्रशासन की नीतियों के प्रभाव, जमीनी सच्चाइयों और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर उनका काम हमेशा चर्चाओं में रहा है।

GIJC25 में मलेशिया जाकर शामिल होना अंकित पचौरी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। उन्होंने कहा कि यह उनके पत्रकारिता जीवन का बहुत ही सुनहरा अवसर था, जहाँ उन्हें दुनिया भर के खोजी पत्रकारों से सीखने और नई तकनीकों को समझने का मौका मिला। अंकित का कहना है कि सम्मेलन में मिले अनुभव और प्रशिक्षण न केवल उनकी खोजी रिपोर्टिंग को नई दिशा देंगे, बल्कि जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को और गहराई से उठाने में भी मदद करेंगे।

साझेदारी आधारित खोजी पत्रकारिता पर चर्चा

दक्षिण एशियाई पत्रकारों के बीच सहयोगात्मक पत्रकारिता (Collaborative Journalism) पर हुए सत्र में GIJN हिंदी संपादक दीपक तिवारी ने बताया कि कैसे साझेदारी और डेटा-आधारित जांच भविष्य की पत्रकारिता का रास्ता तय कर रही है। भारत से स्वतंत्र पत्रकार पूनम अग्रवाल और मयंक अग्रवाल ने भी विभिन्न सत्रों में हिस्सा लिया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता

सम्मेलन की शुरुआत दुनिया भर में पत्रकारों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताते हुए हुई। परिसर में “Journalism is Not a Crime” संदेश दर्शाने वाले बैनर लगे थे, जो पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर वैश्विक संवाद को मजबूती देते थे।

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