20 जुलाई को दिल्ली प्रोटेस्ट में पुलिस बर्बरता पर शिकायतों की कमी से सुप्रीम कोर्ट सख्त, कमेटी को तुरंत जांच शुरू करने का निर्देश

20 जुलाई पुलिस क्रैकडाउन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, HPEC को शिकायतों का इंतजार किए बिना एक महीने में सौंपनी होगी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट।
delhi protest police lathi charge
20 जुलाई की पुलिस बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। HPEC को बिना देरी जांच शुरू कर एक महीने में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
Published on: 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 5 नवंबर को कहा कि 20 जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) के ऑनलाइन पोर्टल पर बहुत कम शिकायतें मिली हैं। यह हिंसा NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 31 अक्टूबर को HPEC द्वारा सौंपी गई 'कार्रवाई रिपोर्ट' (ATR) का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि पोर्टल पर नाममात्र की प्रतिक्रिया मिली है। इसके अलावा, ईमेल, डाक या HPEC कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से जाकर भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस विशेष समिति का गठन अगस्त महीने में किया गया था। इसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। इस समिति ने लगभग तीन सप्ताह पहले, अक्टूबर के मध्य में अपना ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया था ताकि पीड़ित अपनी बात आसानी से रख सकें।

कार्रवाई रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार सार्वजनिक नोटिस जारी किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों की ओर से शिकायतें नहीं आ रही हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि शिकायतों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और यह जानकारी केवल अध्यक्ष तथा HPEC सदस्यों तक ही सीमित रहेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित बिना अपना नाम, फोन नंबर, पता या आधार विवरण दिए, गुमनाम रूप से भी शिकायत दर्ज करा सकते थे। इसके लिए पोर्टल पर प्रभावित प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों के लिए अलग-अलग विंडो भी बनाई गई थीं।

इन परिस्थितियों और एटीआर को ध्यान में रखते हुए, पीठ ने शीर्ष अदालत में मौजूद याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे हिंसा से जुड़ी जो भी सामग्री या वीडियो क्लिप उनके पास है, उसे विचार के लिए HPEC को सौंप दें। अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा भेजी गई जानकारी और सबूतों की समिति द्वारा विस्तार से जांच की जाए।

अदालत ने HPEC को निर्देश दिया कि वह आरोपों की जांच का अपना काम शुरू करने के लिए सामग्री का 'अनिश्चित काल' तक इंतजार न करे। पीठ का कहना था कि समिति उपलब्ध शिकायतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा सकती है और जैसे-जैसे नई शिकायतें आती जाएं, उन्हें भी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

अदालत का यह निर्देश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की उस दलील के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने अभी तक HPEC के साथ कोई जानकारी, सबूत या सामग्री साझा नहीं की है। ग्रोवर ने सवाल उठाया कि अगर पैलेट गन चलाई गई थी, तो इसे किसने अधिकृत किया, इसका आदेश कहां है और गोला-बारूद का रजिस्टर कहां है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की जानकारी मांगने वाली याचिकाओं पर HPEC को विचार करना चाहिए। पैनल को बिना किसी देरी के अधिकारियों से इन सवालों के जवाब दर्ज करने होंगे। सीजेआई ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जो भी सामग्री सामने आए, अधिकारियों को उसका जवाब देना होगा और समिति को अब अपनी तथ्य-अन्वेषण (फैक्ट-फाइंडिंग) रिपोर्ट देनी शुरू करनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कुछ महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की निगरानी या जासूसी करना उनके निजता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने तर्क दिया कि मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले इतने गंभीर मुद्दों की जांच केवल समिति पर नहीं छोड़ी जानी चाहिए, बल्कि अदालत को स्वयं इन सवालों पर विचार करना चाहिए।

सुनवाई के अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को एक महीने के भीतर अपनी पहली तथ्य-अन्वेषण रिपोर्ट सौंपने को कहा है। अदालत ने कहा कि जब तक गोपनीयता की सख्त आवश्यकता न हो, समिति के प्रासंगिक निष्कर्षों को सभी पक्षों के साथ साझा किया जाना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई अब दिसंबर में होगी।

गौरतलब है कि 20 जुलाई को दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा बुलाए गए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी। इस हिंसक पुलिस क्रैकडाउन में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

delhi protest police lathi charge
UP: फिरोजाबाद में गैंगरेप पीड़िता दलित किशोरी ने 6 दिन तक मौत से जूझने के बाद तोड़ा दम, सत्ता के कथनी-करनी पर विपक्ष का सवाल
delhi protest police lathi charge
मणिपुर मसले के स्थायी समाधान की मांग: नागा संगठनों ने पीएम मोदी से लगाई गुहार, अवैध कुकी घुसपैठ पर रोक की अपील
delhi protest police lathi charge
बंगाल में ईसाइयों पर हमले और उत्पीड़न के खिलाफ विशाल शांति मार्च: 'हम शांतिप्रिय हैं, लेकिन बार-बार कुचला नहीं जा सकता'

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें