बंगाल में ईसाइयों पर हमले और उत्पीड़न के खिलाफ विशाल शांति मार्च: 'हम शांतिप्रिय हैं, लेकिन बार-बार कुचला नहीं जा सकता'

बंगाल में प्रार्थना सभाओं पर 48 से अधिक हमलों और धर्मांतरण के झूठे मुकदमों के खिलाफ ईसाई समुदाय ने खोला मोर्चा, सरकार से हस्तक्षेप की मांग।
Bengal Christian protest, Christian peace march Kolkata
बंगाल में चर्चों पर हमले और धर्मांतरण के झूठे आरोपों के विरोध में ईसाइयों का शांति मार्च। समुदाय ने चेतावनी दी- 'हम चुप नहीं बैठेंगे'।Pic Credit- Sanat Kr Sinha (telegraphindia.com)
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में ईसाई समुदाय ने प्रार्थना सभाओं, पूजा स्थलों और चर्चों पर हो रहे लगातार हमलों और तोड़फोड़ के विरोध में गुरुवार को एक बड़ा शांतिपूर्ण जुलूस निकाला। समुदाय के सदस्यों ने हावड़ा, सियालदह और मैदान जैसे तीन अलग-अलग स्थानों से प्रार्थना करते हुए मार्च शुरू किया, जो बाद में रानी रासमणि एवेन्यू पर आकर एक विशाल सभा में तब्दील हो गया।

इस शांति जुलूस के समापन पर ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष ने स्पष्ट संदेश दिया कि ईसाई स्वभाव से शांतिप्रिय लोग हैं। हालांकि, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि उन्हें बार-बार कुचला या दबाया जा सकता है।

बंगिया ख्रिस्तिया परिसेवा के हेरोद मल्लिक ने अपने एक बयान में बताया कि उन्होंने ऐसी 48 घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इनमें से 32 मामलों में पीड़ितों को एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के मूल अधिकार से भी वंचित कर दिया गया। केवल 16 मामलों में ही प्रभावित लोग पुलिस में अपनी औपचारिक शिकायत दर्ज करा सके।

मल्लिक ने बताया कि समुदाय पर मुख्य रूप से जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह से एक झूठा नैरेटिव है, जिसे शांतिपूर्ण ईसाई प्रार्थना सभाओं को अवैध धर्मांतरण कार्यक्रमों के रूप में फंसाने के लिए जानबूझकर गढ़ा जा रहा है।

क्रिसमस के करीब आने के साथ ही, समुदाय के भीतर इन हालातों को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस महत्वपूर्ण सभा में विभिन्न संप्रदायों के कम से कम 300 पुजारियों ने हिस्सा लिया।

गुड शेफर्ड डिनॉमिनेशन इन इंडिया के आर्कबिशप जोसेफ डिसूजा ने कहा कि जबरन धर्मांतरण के दावों का इस्तेमाल समुदाय के खिलाफ केवल एक दुष्प्रचार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल में हाल के महीनों में ईसाई समुदाय पर हुए हमलों और अत्याचारों की जानकारी अब पूरे भारत को है, जबकि ईसाई किसी भी झूठे या कपटपूर्ण धर्मांतरण में शामिल नहीं हैं।

फेडरेशन ऑफ चर्चेज इन इंडिया के संयोजक और ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष डिसूजा ने स्पष्ट किया कि अब समुदाय खामोश नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि चुपचाप बैठकर कुछ न करने का समय अब खत्म हो चुका है।

डिसूजा ने आगे कहा कि समुदाय अब नागरिक समाज के मंच से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब भी बोलने की जरूरत होगी, वे बोलेंगे और शांतिपूर्ण होने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी बार-बार उनका फायदा उठा ले।

सभा में मौजूद कई लोगों ने बंगाल के ऐतिहासिक रूप से ईसाई धर्म के साथ जुड़े होने और इसकी बहु-आस्था वाली समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का भी प्रमुखता से जिक्र किया।

चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के कलकत्ता डायोसिस के बिशप और मॉडरेटर रेवरेंड पारितोष कैनिंग ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं घट रही हैं, जिनकी शायद सरकार को भी जानकारी नहीं है। कुछ छोटे इलाकों में ईसाइयों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। यही कारण है कि वे सरकार को अपनी जमीनी चुनौतियों से अवगत कराना चाहते हैं और उन्हें इस संवेदनशील मामले में सरकार से पूर्ण समर्थन की उम्मीद है।

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